आइये जानते हैं उनके बारे में : जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई, भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश, न केवल अपने कानूनी कौशल के लिए बल्कि सामाजिक न्याय के प्रति उनकी गहरी प्रतिबद्धता के लिए भी जाने जाते हैं। उनका एक किस्सा, जो उनके शुरुआती करियर से जुड़ा है, जब वे एक युवा वकील के रूप में महाराष्ट्र के अमरावती में प्रैक्टिस कर रहे थे। बता दें कि डॉक्टर. बी आर गवई प्रथम बुद्धिस्ट और दूसरे अनुसूचित जाति से भारत के 52 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में निर्वाचित हुए।
बता दें कि 1980 के दशक में, जस्टिस गवई ने एक गरीब दलित परिवार की मदद की, जिसे स्थानीय जमींदार द्वारा जमीन के एक छोटे टुकड़े से बेदखल किया जा रहा था। यह परिवार अपनी जमीन का कोई कानूनी दस्तावेज नहीं होने के कारण हताश था। गवई, जो खुद एक साधारण पृष्ठभूमि से आए थे और सामाजिक भेदभाव की कठिनाइयों को समझते थे, ने इस केस को मुफ्त में लड़ने का फैसला किया। उन्होंने स्थानीय रिकॉर्ड्स, गवाहों और पुराने दस्तावेजों की गहन छानबीन की, और लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निचली अदालत में उस परिवार का हक बहाल करवाया।
इस केस ने न केवल उस परिवार की जिंदगी बदली, बल्कि स्थानीय समुदाय में गवई को एक ऐसे वकील के रूप में स्थापित किया, जो वंचितों की आवाज बन सकता है। यह घटना उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट थी, जिसने उन्हें सामाजिक न्याय और समानता के लिए और दृढ़ कर दिया। बाद में, सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में, उन्होंने कई ऐसे फैसलों में हिस्सा लिया, जो दलितों, आदिवासियों और अन्य वंचित वर्गों के अधिकारों को मजबूत करते थे।
यह किस्सा जस्टिस गवई की जड़ों से जुड़ा है और दर्शाता है कि उनकी बौद्ध धर्म और डॉ. बी.आर. आंबेडकर की शिक्षाओं के प्रति निष्ठा केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि उनके कार्यों में भी झलकती है। उनकी यह संवेदनशीलता और निष्ठा उन्हें भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में और अधिक महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि वे न केवल कानून के रक्षक हैं, बल्कि सामाजिक समावेशिता के प्रतीक भी हैं।
अब जानते हैं उनके प्रोफाइल के बारे में –
नाम: जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई
पद: भारत के 51वें मुख्य न्यायाधीश (CJI)
कार्यकाल शुरू: मई 2025
उपलब्धि: भारत के पहले बौद्ध मुख्य न्यायाधीश के रूप में इतिहास रचा।
पृष्ठभूमि:
- जन्म: 24 नवंबर 1960, अमरावती, महाराष्ट्र।
- शिक्षा: कानून की डिग्री, नागपुर विश्वविद्यालय।
करियर:
- 1987 में वकालत शुरू की, बॉम्बे हाई कोर्ट में प्रैक्टिस।
- 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट के जज बने।
- 2019 में सुप्रीम कोर्ट के जज नियुक्त।
- मई 2025 में CJI के रूप में शपथ, जस्टिस संजीव खन्ना के बाद पद संभाला।
महत्वपूर्ण योगदान:
- सामाजिक न्याय और समानता पर जोर, खासकर दलित और वंचित वर्गों के अधिकारों पर।
- कई ऐतिहासिक फैसलों में भूमिका, जैसे अनुच्छेद 370 और आरक्षण से संबंधित मामले।
- अपनी सादगी और निष्पक्षता के लिए जाने जाते हैं।
विशेषता:
- बौद्ध धर्म को अपनाने वाले पहले CJI, जो डॉ. बी.आर. आंबेडकर के विचारों से प्रेरित हैं।
- महाराष्ट्र के एक साधारण परिवार से शीर्ष न्यायिक पद तक का प्रेरणादायक सफर।
प्रभाव: जस्टिस गवई की नियुक्ति को सामाजिक समावेशिता और विविधता का प्रतीक माना जा रहा है। उनकी निष्पक्ष और संवेदनशील न्यायिक दृष्टिकोण से न्यायपालिका में नए मानक स्थापित होने की उम्मीद है।







