मर्णिकर्णिका के बाद अरुणिमा के रोल में नजर आ सकती हैं कंगना रनौत

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मुंबई 6 नवंबर। लगता है बॉलीवुड की ‘क्वीन’ कंगना रनौत को बायोपिक बहुत पसंद आ रही है। आज कल वो ‘मर्णिकर्णिका:द क्वीन ऑफ झांसी’ की शूटिंग कर रही हैं। खबरों की माने तो वो माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली विकलांग महिला अरुणिमा सिन्हा की भूमिका निभाएंगी। सूत्रों के मुताबिक, कंगना का शेड्यूल अभी बहुत व्यस्त है,इसलिए फिल्म के मेकर्स को उनके और कृति सेनन के बीच में से किसी को चुनना होगा।

बायोपिक के बारे में सूत्र ने कहा अरुणिमा पर बायोपिक की शूटिंग 60 दिन में खत्म हो जाएगी। कंगना फिलहाल जयपुर में रानी लक्ष्मीबाई बायोपिक की शूटिंग कर रही हैं। दिसंबर में शूटिंग खत्म करने के बाद कंगना यह फिल्म साइन कर सकती हैं। एक महीने में फिल्म का डायरेक्टर भी फाइनल हो जाएगा।
शाहजाद-पुर इलाके में एक छोटे-से मकान में रहने वाली अरुणिमा सिन्हा के जीवन का बस एक ही लक्ष्य था भारत को वॉलीबॉल में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना। छठी कक्षा से ही वे इसी जूनून के साथ पढ़ाई कर रही थीं।

इसी बीच 11 अप्रैल, 2011 की एक घटना ने उनकी जिंदगी ही बदल कर रख दी।वो पद्मावत एक्सप्रेस से लखनऊ से नई दिल्ली जा रही थीं कि बरेली के पास कुछ लुटेरों ने लूटपाट में नाकाम रहने पर उन्हें चलती गाड़ी से नीचे फेंक दिया। इस हादसे में अरुणिमा का बायां पैर ट्रेन के पहियों के नीचे आ गया। पैर कटने के साथ ही पूरा शरीर लहुलुहान हो गया। अचानक मिले इस शारीरिक और मानसिक आघात ने अरुणिमा ही नहीं, पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया। लेकिन इस भीषण संकट में भी अरुणिमा ने हार नहीं मानी। इसके बाद यह लक्ष्य था विश्व की सबसे ऊंची चोटी एवरेस्ट को फतह करने का।

अब तक कोई भी विकलांग ऐसा नहीं कर पाया था। कटा हुआ बायां पैर, दाएं पैर की हड्डियों में पड़ी लोहे की छड़ और शरीर पर जख्मों के निशान के साथ एम्स से बाहर आते ही अरुणिमा सीधे अपने घर न आकर एवरेस्ट पर चढऩे वाली पहली भारतीय महिला पर्वतारोही बछेंद्री पॉल से मिलने जमशेदपुर जा पहुंचीं। इसके बाद अरुणिमा ने पॉल की निगरानी में नेपाल से लेकर लेह, लद्दाख में पर्वतारोहण के गुर सीखे। उत्तराखंड में नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग और टाटा स्टील ऑफ एडवेंचर फाउंडेशन से प्रशिक्षण लेने के बाद 1 अप्रैल, 2013 को उन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की। 53 दिनों की बेहद दुश्वार पहाड़ी चढ़ाई के बाद आखिरकार 21 मई को वे एवरेस्ट की चोटी फतह करने वाली विश्व की पहली महिला विकलांग पर्वतारोही बन गईं। इस अरुणिमा के जीवन में मूवी बनाई जा रही है।

 

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