लखनऊ 27 मई। ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम के अमित को 25 मई की दोपहर दो बजे के लगभाग जनपद कुशीनगर के मेहदी ने फोन कर रोते हुए बताया की उन्हें और उनके बच्चो सहित अन्य पांच साथियों को जबरन मारपीट कर बंधुआ मजदूरी और बाल मजदूरी करायी जा रही हैं। मेहंदी ने बताया की वह शर्त के अनुसार प्रति व्यक्ति 15000 हजार रुपये महीना और खाना खुराकी हर हफ्ते देने की बात पर वह पटहेरवा थाना क्षेत्र के एस.के. ईट भट्ठे पर काम करने आये थे लेकिन भट्ठा मालिक उन्हें और उनके साथियों को पैसा नहीं दे रहा हैं जब वह भट्ठा मालिक नब्बू खान से पैसा मांगे तो मालिक ने उनके सहित सभी मजदूरो को मारापीटा और धमकी देते हुए बोला की भट्ठा बंद होने से पहले दुबारा पैसा मत मांगना नहीं तो तुम लोग काम करने लायक नहीं रहोंगे और अब ना तो तुम सब पैसा मांगोगे और ना ही भट्ठे से कहीं जाओगे यदि भट्ठे से भागने की कोशिश किये तो तुम्हारे लिए ठीक नहीं होगा।
मेहंदी ने रोते हुए ये भी बताया की भट्ठे मालिक ने मुंशी सहित दो तीन लोगो को उनकी निगरानी करने के लिए लगा रखा है की वह लोग भट्ठे से भाग ना पाए। मेहंदी ने ये भी बताया की भट्ठा मालिक ने उनके साथ साथ दो बच्चों को भी जबरन कोयला ढोने के काम में लगा रखा है! ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम के अमित ने मेहंदी की बातों को गंभीरता से लेते हुए अपने वालेंटियर सुरेश भारती को भट्ठे पर भेजकर जांच कराई जांच में मेहंदी की बात के आरोप सही पाए गए!
फोरम जांच के आधार पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आफिस सहित मुख्य सचिव उत्तर प्रदेश, पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश, जिलाधिकारी कुशीनगर, पुलिस अधीक्षक कुशीनगर, को इमेल, ट्विटर के साथ मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल पर लिखित शिकात किया की जनपद कुशीनगर के थाना पटहेरवा क्षेत्र के जौरा बाजार स्थित एस.के. मार्का ईट भट्ठे पर दो बच्चो सहित आठ मजदूरों को बंधक बनाकर जबरन बंधुआ मजदूरी कराई जा रही हैं।
ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम की शिकायत पर हरकत में आये जिलाधिकारी कुशीनगर ने अपने अधिकारियों और पुलिस की सयुक्त टीम भेजकर भट्ठे पर छापा मारकर बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराया और जिलाधिकारी कुशीनगर के आदेश के अनुसार मजदूर मेहदी की लिखित शिकायत पर दबंग भट्ठा मालिक नब्बू खान और भट्ठा के मुंशी के खिलाफ थाना पटहेरवा जनपद कुशीनगर में अपराध स. 189ध्18 धारा 342, 406, 504, 506 के अन्तर्गत दर्ज किया गया।
हालांकि पूरे मामले में कानून के अनुसार नियमानुसार कार्यवाही नहीं किया जा रहा हैं जबकि बंधुआ मजदूरों में अनुसूचित जाती के लोग बंधुआ मजदूरी के साथ साथ बाल मजदूरी भी कराया जा रहां था लेकिन उसके बावाजूद भी आरोपियों के खिलाफ अनुसूचित जाति अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं और बाल मजदूरी की धाराओं को नहीं जोड़ा गया। यहा यह बताना अत्यंत आवश्यक हैं की क्षेत्रीय प्रशासन दबंग भट्ठा मालिक को बचाने का पूरा प्रयास कर रहा था लेकिन ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम की वजह से पीड़ितों की आवाज को नहीं दबा सकें और अंततः आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना ही पड़ा।ह्यूमन राईट मानिटरिंग फोरम पीड़ितों को उचित मुआवजा और आरोपियों के खिलाफ अपराध की धारा बढाने के लिए सघर्ष कर रहा है।







