- 15 करोड़ रुपये की पॉलिथीन हो गई कूड़ा और सौ करोड़ का कारोबर खत्म
लखनऊ, 16 जुलाई 2018: सरकार द्वारा पॉलिथीन पर प्रतिबंध क्या लगाया गया व्यापारियों और फुटकर दुकानदारों पर आफत ही टूट पड़ी। सरकार के पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के फैसले से प्रदेश में लगभग 100 करोड़ रुपये की पॉलिथीन डम्प हो गई। वहीं, लखनऊ में लगभग 15 करोड़ रुपये की पॉलिथीन फैक्ट्री और दुकानदारों के पास रखी हुई है। प्रतिबंध लगने से पहले शहर में वैध-अवैध मिलाकर लगभग एक सौ फैक्ट्रियां कैरी बैग बना रही थीं।
इसके चलते प्रदेश में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार में जुड़े छोटे और बड़े पचास हजार लोग बेरोजगार हो रहे है। दूसरी तरफ यह भी प्रश्न उठाया जा रहा है कि अन्य तमाम तरह की खाद्य एवं पेय सामग्री पाॅलीबैंग में आ रही उन पर रोक कब लगेंगी। क्योकि उनके कारण भी तो उसी तरह से पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
पॉलिथीन प्रतिबंध पर सरकार के ऐलान से शहर में फैक्ट्री और दुकानदारों के पास रखी लगभग 15 करोड़ रुपये की पॉलिथीन कूड़ा हो गई। इस सम्बंध में प्लास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जैन बताते हैं कि वैसे तो शहर में अभी भी 50 माइक्रोन से मोटी पॉलिथीन बन रही है। लेकिन सरकार के प्रतिबंध लगाने के बाद फैक्ट्रियों में लगभग 300 टन बना हुआ माल डम्प पड़ा है।
सूत्रों का कहना है कि अवैध फैक्ट्रियों और दुकानदारों के पास भी लगभग 600 टन माल पड़ा हुआ है। लखनऊ में जहां वैध-अवैध लगभग 100 फैक्ट्रियां काम कर रही हैं। वहीं पूरे प्रदेश में यह संख्या हजारों में पहुंच जाती है, जिससे लगभग तीन हजार टन बनी पॉलिथीन रखी हुई है।

लखनऊ प्लास्टिक एसोसिएशन के अध्यक्ष रवि जैन का कहना है कि सबसे ज्यादा संशय इस बात पर है कि सरकार सभी तरह के पॉलिथीन को प्रतिबंधित करने की बात कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश भर में पॉलिथीन बना रही हजारों फैक्ट्रियां बंद हो जाएंगी। वहीं केवल लखनऊ में ही लगभग 50 हजार के आसपास फैक्ट्री में काम कर रहे कर्मचारी बेरोजगार हो जाएंगे।
उन्होंने बताया कि बिस्कुट, ब्रेड, दालमोठ, रेवड़ी, मेहंदी, चाय की पत्ती समेत कुछ ऐसी चीजें हैं जिनको छोटे कारोबारी भी प्लास्टिक में पैक करके बेचते हैं। इनके कारोबार पर भी असर पड़ेगा। ज्ञात हो कि सपा सरकार ने जब पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाया गया था। तब भी प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों के मालिक तत्कालीन शासन के अधिकारियों को यह समझाने में कामयाब हो गए थे कि प्रतिबंध लगने से सरकार का लगभग 600 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।
ऐसे में शासन ने उन्हें स्टॉक में रखा माल बेचने व खपाने की अनुमित मौखिक दे दी थी। लेकिन इन फैक्ट्रियों का रवैया नहीं बदला वह अपना पुराना माल तो खपाते रहे लेकिन फैक्ट्रियों में उत्पादन बंद नहीं किया। यही कारण है कि इतनी बड़ी मात्रा में बनी पॉलिथीन फैक्ट्री, दुकानों में डम्प हो गई है।







