जानिए सबसे पहले महात्मा गाँधी जी को राष्ट्रपिता कहकर किसने संम्बोधन किया

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ज़रा याद करों कुर्बानी: गाँधी जयंती 2 अक्टूबर विशेष:

बात 6 जुलाई 1944 की है जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस का आंदोलन आज़ादी के लिए अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दे रहा था। उस दिन वह बर्मा के रंगून से रेडियो पर भाषण दे रहे थे उस दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने महात्मा गांधी को सर्वप्रथम ‘राष्ट्रपिता’ कहकर संबोधित किया था। उसी समय से देश के लोग भी उन्हें राष्ट्रपिता कहकर संम्बोधन करने लगे। ऐसा कहा जाता है कि नेताजी और महात्मा गांधी एक-दूसरे का भरपूर सम्मान करते थे, लेकिन इसके साथ दोनों के बीच कुछ मुद्दों को लेकर मतभेद अवश्य हुआ करते थे।

30 जनवरी वर्ष 1948 के दिन नाथूराम गोडसे द्वारा उन्हें गोली मार कर हत्या कर दी गई। महात्मा गांधी की समाधि दिल्ली के राजघाट पर बनी हुई है। वहां हमेशा अखंड ज्योति जलती रहती है। सत्य एवं अहिंसा के पुजारी राष्ट्रीय पिता महात्मा गांधी का नाम इतिहास के पन्नों हमेशा -हमेशा के लिये अमर हो गया। उन्होंने भारत देश को आजादी दिलवाने के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। गांधी जी को याद करते हुए देश वासियों को बड़े गर्व का अनुभव होन स्वाभाविक है।

भले ही महात्मा गांधी आज हमारे बीच न हों, लेकिन वह सभी के जहन में आज भी बसते हैं। देश के बच्चे से लेकर बड़ों बूढ़ों तक की जुबां पर बापू का नाम आज भी अजर अमर है। हम जब भी आजादी की बातें करेंगे तो गांधी जी का जिक्र बिना किये अधूरा ही कहलायेगा।

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1859 को गुजरात के पोरबंदर शहर में हुआ। उनके पिता का नाम करमचंद और माता का नाम पुतलीबाई था। उनकी मां धार्मिक विचारों वाली इस्त्री थीं। उन्होंने अहिंसा के मार्ग पर चलकर देश को आजादी दिलाने में महात्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ साथ लोगों को यह संदेश दिया कि अहिंसा सर्वोपरि है।

हमारे देश में महात्मा गांधी का जन्मदिन राष्ट्रीय पर्व गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जबकि पूरे विश्व समुदाय के लोग इस दिन को अन्तर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाते है। महात्मा गांधी को कई गीत समर्पित किए गए हैं, जो उन्हें भावपूर्ण पुष्पांजलि देने के लिये हैं। इनमें संत कवि नरसी मेहता का लिखा एक भजन ‘वैष्णव जन तो तेने कहिये जे, पीर परायी जाणे रे’ प्रमुख है। – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती

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