लालजी सिंह को डीएनए फिंगर प्रिंट का जनक भी कहा जाता है
वाराणसी, 11 दिसम्बर। वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति पद्मश्री डा. लालजी का रविवार की शाम निधन हो गया। वह 70 साल के थे। हृदयाघात के बाद आनन-फानन में उन्हें बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल की आइसीयू में भर्ती कराया था। जहां इलाज के दौरान रात करीब 10 बजे उन्होंने अंतिम सांसें लीं। वह यहां पर 22 अगस्त, 2011 से 22 अगस्त, 2014 तक कुलपति थे।
विश्वविद्यालय के प्रवक्ता डा.राजेश सिंह का कहना है कि पूर्व कुलपति एवं जौनपुर के ब्लॉक सिकरारा कलवारी गांव निवासी डा. लालजी सिंह तीन दिन पहले अपने गांव आए थे। वह रविवार की शाम हैदराबाद जाने के लिए फ्लाइट पकड़ने बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचे थे। उनकी फ्लाइट शाम 5.30 बजे थी। इससे पहले ही करीब 4 बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ गया। उन्हें सर सुंदरलाल अस्पताल लाया गया है । लालजी सिंह को डीएनए फिंगर प्रिंट का जनक भी कहा जाता है। उनकी जिनोम नाम से कलवारी में ही एक संस्था है। इसमें रिसर्च का कार्य होता है। डा. लालजी सिंह वर्तमान में सीसीएमबी, हैदराबाद के निदेशक भी थे। दिल्ली के तंदूर हत्याकांड को सुलझाने में उनका बहुत योगदान था।






