वॉशिंगटन। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक एक रिटायर्ड अमेरिकी जनरल और रक्षा विशेषज्ञ ने पाकिस्तान व कतर पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में इन दोनों देशों की भूमिका प्रभावित रही और वे अमेरिका की बजाय ईरान का पक्ष लेते रहे।
बता दें कि रिटायर्ड जनरल जैक कीन ने फॉक्स न्यूज को दिए बयान में बताया कि मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान और कतर को चुनने से अमेरिका की ईरान संबंधी कूटनीति प्रभावित हुई। इससे तेहरान के असली इरादों को समझने में गलतफहमी पैदा हुई। ये टिप्पणियां उस समय आई हैं जब ट्रंप ने ईरान पर बड़े सैन्य हमले की योजना रोककर कूटनीतिक कोशिशें फिर शुरू करने का फैसला किया है।
कीन ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ के चेयरमैन हैं। वे रक्षा मंत्रालय की नीति बोर्ड के सदस्य रह चुके हैं, चार अमेरिकी रक्षा मंत्रियों को सलाह दे चुके हैं और 2018 व 2022 की राष्ट्रीय रक्षा रणनीति संबंधी कांग्रेसनल कमेटियों में भी काम कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्य पूर्व में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और संबंधित पक्षों को अच्छी तरह पता है कि पाकिस्तान व कतर की मध्यस्थता संदिग्ध है क्योंकि वे अमेरिका के मुकाबले ईरान का पक्ष लेते हैं। यह कोई नई बात नहीं है, फिर भी मध्यस्थता इन्हीं के हाथ में रही। इसी प्रभाव की वजह से अमेरिका ईरान के असली मंसूबों को लेकर गुमराह हुआ।
कीन ने सऊदी अरब की नीति पर भी निशाना साधा। उनके अनुसार रियाद ने बार-बार वॉशिंगटन को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई न करने की सलाह दी। सऊदी अरब ने अपने एयरबेस और हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से इनकार कर दिया और तर्क दिया कि ऐसा अभियान सफल नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि सऊदी अरब लगातार बातचीत का रास्ता अपनाने पर जोर देता रहा।
कीन के मुताबिक सऊदी अरब मध्य पूर्व को ईरान की आक्रामकता से मुक्त कराने के लिए कोई कुर्बानी देने को तैयार नहीं है। असल में वह ईरान का मुकाबला करने का बोझ अमेरिका और इजराइल पर डालना चाहता था, जबकि खुद अपने तेल इंफ्रास्ट्रक्चर या जान-माल के नुकसान का जोखिम नहीं लेना चाहता था।







