- राम प्रताप गुप्ता
सूरज का जगत से नाता जैसे।
रहा तथागत का मानवता से।।
समाजवाद को रौशन करने।
एक नायक आया बिंदकी से।।
वो ‘नेता जी’ के सच्चे सिपाही।
साथ रहे हर कठिन डगर में।।
कर्त्तव्यों के हैं मूर्त रूप वो।
सादगी और मानवता उनमें।।
जो मिलता बस इनका हो जाता।
जादू इनके कुशल व्यवहार में।।
‘समाजवाद के उगते सूरज’।
अखिलेश की शान में तारे हैं।।
दस जनवरी की किस्मत में।
एक नाम के होंगे अफसाने हैं।।
समाजवाद को भी संबल मिलता।
नरेश उत्तम जी के आदर्शों से।।
सूरज का जगत से नाता जैसे।
रहा तथागत का मानवता से।।
समाजवाद को रौशन करने।
एक नायक आया बिंदकी से।।







