अनुराग प्रकाश की बात
यह पिछले हफ्ते की बात है। यहां पीलीभीत टाइगर रिजर्व के पास बराही में रात को जोरदारआंधी पानी आया । सुबह जब मैं सो कर उठा और बाहर आकर देखा तो बाहर एकदम अंधेरा छाया हुआ था। आसमान काले बादलों से घिरा हुआ था। बहुत ही खुशनुमा मौसम हो रहा था। मैं बाहर बैठकर चाय पी और ऊपर वाले से कहा कि तेज आंधी की वजह से लाइट भी अब एक-दो दिन नहीं आएगी। इसलिए यदि दो तीन दिन बारिश का मौसम रहता है तो गर्मी से राहत रहेगी।
फिर मैंने वाइफ बोला कि आज नाश्ते में कुछ स्पेशल बना लो । यह कह कर मैं पास की ही दुकान से राशन का कुछ जरूरी सामान लेने चला गया। तब तक वाइफ ने नाश्ते में मेरी मनपसंद अरबी की सूखी सब्जी और पूरी बनाई साथ में खीर भी बना ली थी । हम लोग बाहर बरामदे में बैठकर ये बेहतरीन नाश्ता कर ही रहे थे की फिर गरज चमक के साथ बारिश शुरू हो गई । नाश्ता करने के बाद मैं अपने ऑफिस मैनाकोट के लिए निकला और प्लान किया कि आज तो मौसम अच्छा है तो आज थोड़ा आस पास का एरिया भी घूम कर आया जाएगा।
रास्ते में मैं अपने एक मित्र के पास और रुका और उनसे हाल-चाल पूछा । उन्होंने मायूस होते हुए कहा देख रहे हैं भाई साहब कैसे बादल छाए हुए हैं । मेरी गेहूं की फसल तैयार खड़ी है बस इसे काटना ही बाकी है । एक हफ्ते बाद मेरी बेटी की शादी है।
इस मौसम को लेकर मैं बेहद चिंतित हूं। शादी का सारा प्रोग्राम गेहूं के इसी पैसे पर ही निर्भर है। यह कहते कहते वह थोड़ा संजीदा हो गए। मैंने उनके कंधे पर हाथ रखा और बोला परेशान न हो अभी कुछ घंटे में सब बदल छट जाएंगे और बढ़िया धूप निकल आएगी।
उसके बाद आप आराम से गेहूं कटवाना और धूमधाम से अपनी बेटी की शादी करना। मेरे मुंह से यह बात सुनकर उनके चेहरे पर हल्की सी मुस्कान आई। उसके बाद में मैं मैनाकोट के रास्ते में एक छोटी सी दुकान पर रुका और थोड़ा समान खरीदा । दुकान वाले ने मुझसे पूछा कि क्या आप लखनऊ रहते हैं?? मैंने कहा हां।
तब उन्होंने मुझसे वहां के एक हॉस्पिटल के बारे में पूछा कि कैसा है वो हॉस्पिटल वहां मुझे 15 दिन बाद अपनी वाइफ का ऑपरेशन करवाना है।
बस ठीक-ठाक से मेरा ये गेहूं कट जाए जो दुकान के पीछे लगा है। गेहूं की इस फसल के पैसे से मुझे अपने घर में थोड़ा निर्माण कार्य करना है क्योंकि बरसात में घर में पानी टपकता है। लेकिन इस बारिश और आंधी को देखकर बहुत डर लग रहा है।
मैं सोच में पड़ गया कि सुबह जो मौसम मुझे इतना खुशगंवार लग रहा था वह लोगों के लिए इतना खतरनाक साबित हो सकता है। शाम को जब मैं बराही वापस घर आया तो मैं भी थोड़ा उदास था।
वाइफ ने पूछा क्या हुआ सुबह तो आप बहुत प्रसन्न थे ??
कोई बात हो गई क्या??
तब मैंने उन्हें भी सारी बात बताई कि हमारे लिए जो मौसम इतना अच्छा है और हम बारिश की दुआ कर रहे हैं लोग इसी बारिश को लेकर खौफ में है। अब हम दोनों मन ही मन सोच रहे थे कि जल्दी से जल्दी मौसम खुल जाए। हे ईश्वर अगर इस बारिश से इतने लोगों का नुकसान है तो इसे कुछ दिन रोक देना। गर्मी का क्या है वह तो होगी ही अब।
उसके बाद डिनर कर हम लोग सो गए। अगले दिन सवेरे जब मैं उठा और कमरे से बाहर आया तो देखा मौसम बिल्कुल साफ था और सूर्य देव निकल आए थे। मैंने ऊपर वाले को हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया और सोचा आज ये मौसम देखकर कितने परिवार प्रसन्न हुए होंगे। किसान की फसल से उसका घर परिवार एवं उसके सारे सपने जुड़े रहते हैं। फसल बोने से लेकर काटने तक उसे कठिन परिश्रम एवं अनेकों मुसीबत का सामना करना पड़ता है लेकिन शायद फिर भी उसे उतने पैसे नहीं मिल पाते हैं जितने बिचौलियों को मिल जाते हैं।
जब आप ग्रामीण परिवेश में रहते हैं लोगों से मिलते जुलते हैं उनकी तकलीफों को सुनते समझते हैं तो आपको लगता है ऊपर वाले ने जो आपको दिया है उसकी कीमत क्या है। इसलिए हर हाल में उसका धन्यवाद करते रहो।
जगजीत सिंह की ग़ज़ल का एक शेर था इसका अर्थ अब समझ में आता है :
“जिंदगी को करीब से देखो इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा “







