मैंने अपने दिल दिमाग से एवरेस्ट पर विजय पाई, पैरों से नहीं: अरुणिमा सिन्हा

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लखनऊ पुस्तक मेला गोमतीनगर: पांचवां दिवस
अरुणिमा सिन्हा को मिला शान- ए- लखनऊ सम्मान
लखनऊ, 1 मई। ‘मैंने अपना मिशन अपने दिल और दिमाग से किया, पैरों से नहीं……फोकस करके अगर कुछ भी किया जाए तो अंततः वह लक्ष्य हासिल हो जाता है।….. अब मेरा लक्ष्य दिसम्बर तक अंटार्कटिका की सबसे ऊंची चोटी पर तिरंगा लहराने का है।’
ये कहना दुर्घटनावश अपना एक पैर खो चुकी एवरेस्ट विजेता अरुणिमा सिन्हा ने यहां संगीत नाटक अकादमी परिसर गोमतीनगर में चल रहे लखनऊ पुस्तक मेले में सम्मानित होने के अवसर पर व्यक्त किए। यहां उन्हें साई दिल्ली के निदेशक राजीव सरीन, साई लखनऊ की अधिशासी निदेशक रचना गोविल, अंतर्राष्ट्रीय रेफरी वाटर स्पोटर््स सुधीर शर्मा, प्रदेश ओलम्पिक संघ के उपाध्यक्ष टीपी हवेलिया, मेला संयोजक मनोज सिंह चंदेल ने स्मृतिचिह्न अंगवस्त्र आदि देकर ओलम्पियन सैयद अली, जसपाल सिंह, खेल प्रेमियों व गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में सम्मानित किया।
21 मई 2013 पर एवरेस्ट की चोटी पर चढ़ने वाले दिन को सबसे साझा करते हुए पद्मश्री अरुणिमा ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज के युग में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे लक्ष्य नहीं निर्धारित करते। जीवन में पहले लक्ष्य निर्धारित कीजिए। फिर इस तरह उस तरफ बढ़िए कि ऊपर वाला खुद वह लक्ष्य देने को मजबूर हो जाए। जब आप संघर्ष से जब कुछ हासिल करते हैं तो वो कहानी पूरी दुनिया जानना चाहती है। अपने कटे हुए पैर को मैंने अपना हथियार या यूं कहंे कि अपनी कमज़ोरी को मैंने अपनी ताकत बनाया।
आज के कार्यक्रमों की शुरुआत सचिन साधारण के संयोजन, संगमलाल त्रिपाठी भंवर की अध्यक्षता और जगदीप शुक्ल अंचल के संचालन में चले कवि सम्मेलन में केडी शर्मा हाहाकारी स्मृति सम्मान से राजेन्द्र पण्डित व प्रमोद तिवारी स्मृति सम्मान से अशोक पाण्डेय अनहद को सम्मानित किया गया। मुख्यअतिथि महापौर संयुक्ता भाटिया व दूरदर्शन के आत्मप्रकाश मिश्र की उपस्थिति में यहां काव्यपाठ करने वालों में प्रमोद द्विवेदी, धीरज मिश्र, शकुन मिश्र, आलोक मिश्र, दीपक अवस्थी आदि ने काव्यपाठ किया। ज्योति किरन के संयोजन में पर्यावरण विषयों पर आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता में नव्यप्रताप, नील सिन्हा, इशिका सक्सेना, अश्वित, विज्वल सिंह, तनिषा सक्सेना, अनुष्का, क्रान्ति, नीतू रावत, मुस्कान, पूजा व नरगिस इत्यादि बच्चों ने भाग लिया।
 लेखक से संवाद कार्यक्रम में कथाकार शिवमूर्ति ने बताया कि कथा लेखन के लिए सतत अभ्यास और श्रम बहुत जरूरी है। इनसे पहले रचनाकार दयानन्द पाण्डेय प्रशंसकों और पाठकों के बीच थे। इससे पहले काव्यपाठ का कार्यक्रम भी हुआ।
पुस्तक मेले में आज – 2 मई 2018
पूर्वाह्न 11.00 बजे-      मुशायरा: नई कलम
अपराह्न 1.00 बजे-      बच्चों-युवाओं की प्रस्तुतियां
अपराह्न 2.00 बजे-      पैनल डिस्कशन- कौशल विकास
अपराह्न 3.00 बजे-      बच्चों-युवाओं की प्रस्तुतियां
अपराह्न 4.00 बजे-      लेखक से संवाद: डा.सूर्यकुमार पाण्डेय
शाम 5.30 बजे-         ओपन माइक सेशन
शाम 7.00 बजे-         कवयित्री सम्मेलन

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