लेखक: प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी
11 अप्रैल को 200वें जयंती वर्ष की शुरुआत, शिक्षा, समानता और सामाजिक न्याय के प्रतीक महात्मा फुले को श्रद्धांजलि
नई दिल्ली : आज 11 अप्रैल को देश महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले की जन्म-जयंती मना रहा है। इस वर्ष यह अवसर और भी खास है क्योंकि उनके 200वें जयंती वर्ष का शुभारंभ हो रहा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने महात्मा फुले को श्रद्धांजलि देते हुए उन्हें नैतिक साहस, आत्म-चिंतन और समाज हित के प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा कि महात्मा फुले का जीवन पीढ़ियों के लिए प्रेरणापुंज बना हुआ है।
1827 में महाराष्ट्र के एक साधारण परिवार में जन्मे ज्योतिराव फुले ने बचपन से ही जिज्ञासु स्वभाव दिखाया। उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार माना और कहा कि ज्ञान सभी के लिए साझा होना चाहिए। जब समाज में लड़कियों और वंचित वर्गों को शिक्षा से दूर रखा जाता था, तब उन्होंने उनके लिए स्कूल खोले। वे मानते थे कि मां के माध्यम से बच्चों में सुधार आता है, इसलिए लड़कियों की शिक्षा सबसे पहले जरूरी है।
महात्मा फुले ने सत्यशोधक समाज की स्थापना की, जो सामाजिक सुधार, न्याय और समान अधिकारों के लिए एक महत्वपूर्ण आंदोलन बना। उन्होंने कहा था, “जब तक समाज के सभी लोगों को समान अधिकार नहीं मिलते, तब तक सच्ची आजादी नहीं मिल सकती।”
उनके साथ उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले भी एक महान समाज सुधारक थीं। वे भारत की पहली महिला शिक्षिकाओं में शामिल रहीं और लड़कियों की शिक्षा के लिए लगातार संघर्ष करती रहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने लेख में कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने युवाओं के लिए शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन को प्राथमिकता दी है, जो महात्मा फुले के शिक्षा संबंधी विचारों से प्रेरित है। फुले का जीवन हमें सिखाता है कि अन्याय के खिलाफ खड़े होना और समाज को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
महात्मा ज्योतिराव फुले 200 साल बाद भी केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारत के भविष्य के मार्गदर्शक बने हुए हैं। उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों में नई उम्मीद और आत्मविश्वास जगाते हैं।







