नई दिल्ली । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली के पल्मोनरी मेडिसिन एंड स्लिप डिसॉर्डर विभाग में देश का पहला वचरुअल ब्रोनोस्कोपी नेविगेशन (वीबीएन) सिस्टम स्थापित किया है। इसके तहत अब फेफड़ों में धब्बेनुमा छोटे ट्यूमर का भी उपचार संभव हो सकेगा। एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि इससे फेफड़ों की समस्या से परेशान मरीजों को फायदा होगा। डॉक्टरों ने कहा कि देश में फेफड़ों से संबंधित बीमारियां लगातार बढ़ रही हैं। एक्सरे व सीटी स्कैन के जरिये फेफड़ों में छोटे ट्यूमर का पता लगाना संभव नहीं है। अगर इन छोटे ट्यूमर का समय रहते उपचार नहीं हुआ तो यह फेफड़ों के कैंसर के लिए भी जिम्मेदार होते हैं। आमतौर पर ऐसे छोटे ट्यूमर की जांच के लिए बायोप्सी की आवश्यकता होती है, जिसमें सुई के जरिये सीने में छेद कर फेफड़ों से सैंपल जुटाया जाता है, लेकिन एम्स में वीबीएन सिस्टम स्थापित होने के बाद यह प्रक्रिया बेहद आसान और सुरक्षित हो जाएगी। साथ ही इससे फेफड़ों का स्पष्ट परीक्षण सुनिश्चित हो सकेगा। इसमें सुई के जरिये सीने में छेदकर सैंपल जुटाने की आवश्यकता नहीं होगी।
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