यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट में झांसी मण्डल प्रदेश में रहा सबसे आगे
लखनऊ, 10 अप्रैल। नवजात शिशु की घर पर देखभाल (एचबीएनसी) के मामले में झांसी मण्डल ने प्रदेश में प्रथम स्थान हासिल किया है।
यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट के आंकड़े बताते है कि मण्डल में जनवरी 2018 से लेकर मार्च 2018 तक आशा द्वारा घर-घर जाकर नवजात की गंभीर परिस्थिति में 60 फीसदी विजिट की गयी जोकि पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। इस दौरान मण्डल में यूनिसेफ़ टीम द्वारा 485 नवजात शिशुओं की निगरानी की गई, जिसमें 344 बच्चों का निरीक्षण आशाओं द्वारा किया गया। जिनमें से 290 नवजात शिशुओं को तीन गंभीर परिस्थिति (हाथ धुलना, वज़न लेना और तापमान लेना) की देखभाल की गयी।
यूनिसेफ की मण्डल और जिला रैंकिंग में सहारनपुर मण्डल दूसरे स्थान एवं आजमगढ़ मण्डल तीसरे स्थान पर रहा। इसके अलावा आगरा चौथे, फैजाबाद व लखनऊ संयुक्त रूप से 10वें, कानपुर 11वें तथा इलाहाबाद व वाराणसी क्रमशः 12वें एवं 15वें स्थान पर मौजूद रहा है।
यूनिसेफ़ हर तीन महीने में राज्य स्तरीय रैंकिंग निकालता हैं पिछली रैंकिंग में भी झाँसी मण्डल प्रथम स्थान पर था। जिसमें झाँसी छठवे, ललितपुर उन्नीसवें, और जालौन चौथे स्थान पर था।
डॉ॰ सुरेश सिंह, मुख्यचिकित्सा अधिकारी ने बताया “कि होम बेस्ड न्यू बोर्न केयर यानि की गृह आधारित शिशु देखभाल एक ऐसा कार्यक्रम है जिसमें नवजात शिशुओं की आशा द्वारा घर पर ही देखभाल की जाती है। इसके लिए आशाओं को पहले से ही प्रशिक्षण दिया जाता हैं। जिसमें आशा शिशु को उसके जीवनकाल के प्रथम 6 सप्ताह में सुरक्षित रखने हेतु प्रयास करती है। आशा द्वारा प्रसव के बाद 42 दिनतक 6 से 7 बार गृह भ्रमण कर नवजात शिशुओं और माताओं की देखभाल सुनिश्चित करती है एवं उक्त कार्यों का मूल्यांकन एवं सत्यापन समय समय पर ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों एवं जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा किया जाता हैं। उक्त कार्यक्रम की गुणवत्ता बनाए रखने हेतु सतत प्रयास जारी हैं।
गृह आधारित शिशुओं की देखभाल शिशु मृत्यु दर को कम करने में काफी सहायक हैं। जिला स्तर पर जनवरी 2018 से लेकर मार्च 2018 तक झाँसी जनपद में यूनिसेफ़ द्वारा कुल 167 नवजात की निगरानी की गई। जिसमें 116 बच्चे ऐसे थे जिन्हे सम्पूर्ण देखरेख दी गई, जोकि किसी भी जिले के लिए की गयी सबसे अधिक विजिट है।
इसके अलावा जालौन में 220 नवजात की निगरानी की गई जिसमें गंभीर परिस्थितियों में आशा द्वारा 126 बच्चों विजिट की गयी जिससे जालौन जनपद का प्रदेश में 10वां स्थान रहा है। ललितपुर में 98 नवजात शिशुओं को निगरानी की गई जिसमें 48 बच्चों को सम्पूर्ण देखरेख मिली, जिससे ललितपुर का प्रदेश में 17वां स्थान रहा।
सुनील कुमार चौधरी, डिवीज़नल मॉनिटर, यूनिसेफ़ बताते हैं कि गृह आधारित शिशुओं की देखभाल के पीछे बच्चों को तीन गंभीर परिस्थितियों से बचाए रखना हैं। और वो तीन गंभीर परिस्थितियाँ हैं-
हाथ धुलना:
बच्चों को छूने से पहले हाथ धुलना बहुत जरूरी, इससे बच्चे को संक्रामण से बचाया जा सकता हैं।
बच्चे का वज़न करना:
समय समय पर बच्चे का वज़न करने से ये पता चलता रहता है कि बच्चे का वज़न बढ़ रहा हैं या नहीं, जिससे बचे की वृद्धि को आँका जाता हैं या बच्चा सही स्तनपान कर रहा हैं या नहीं इसका पता लगाया जाता हैं।
बच्चे का तापमान लेना:
नियमित रूप से बच्चे का तापमान लिया जाता हैं, जिससे कि ये पता लगा जाए कि बच्चे को कहीं ठंडा या गरम बुखार तो नहीं हैं।







