नई दिल्ली। दिल्ली एम्स प्रबंधन जल्द ही ऑनलाइन सिस्टम में बड़ा सुधार लाने जा रहा है। इसके बाद मरीज 50 फीसदी ही ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। 30 फीसदी इलाज का पंजीयन अस्पताल पहुंचकर करवाया जा सकेगा। इतना ही नहीं, तारीख लेने के बाद भी अस्पताल न आने वाले मरीजों को अब एक महीने से ज्यादा की तारीख नहीं दी जाएगी। दरअसल, ऑनलाइन सिस्टम संस्थान के लिए सिरदर्द बना हुआ है। डॉक्टरों की माने तो एम्स एक रेफरल अस्पताल है। इसके कारण सिर्फ किसी अन्य अस्पताल से रेफर मरीज का उपचार ही कर सकता है। ओपीडी की ऑनलाइन तारीख मिलने से डॉक्टरों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। बुखार और सिरदर्द के मरीजों की संख्या बढ़ने से डॉक्टर परेशान हैं। ऑनलाइन सुविधा के चलते हर दिन कई हजार मरीज घर बैठे इलाज के लिए तारीख लेते हैं। आंकड़ों के अनुसार, पिछले 20 दिन के भीतर 18 हजार से ज्यादा मरीजों ने ऑनलाइन सिस्टम से पंजीकरण कराकर ओपीडी में इलाज करवाया है। लेकिन अबमरीजों की बढ़ती संख्या डॉक्टरों के लिए परेशानी बन गई है, जिसके बाद प्रबंधन ऑनलाइन सिस्टम में सुधार करने जा रहा है। एम्स 20 फीसदी पंजीयन अपने अधीन रख सकता है।
मरीज खाता है धक्के
एक वरिष्ठ डॉक्टर की माने तो मरीज इंटरनेट पर जाकर परेशानी के अनुसार तारीख लेता है। किसी को पेट में दर्द है तो वह गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग पहुंचता है। जबकि उसे पेट में दर्द और भी वजहों से हो सकता है। कई बार पथरी या किडनी-लिवर के कारण भी ऐसा होता है। ये मरीज एम्स आने के बाद बार-बार विभागों में धक्के खाते रहता है। इसके कारण बदनामी डॉक्टरों की होती है। उन्होंने कहा कि अभी यूरोलॉजी, रुमेटोलॉजी, स्किन, मेडिसिन और नेफ्रोलॉजी की ओपीडी में नए मरीजों को अगले साल 27 फरवरी 2019 से पहले की तारीख नहीं है। एम्स में नए मरीजों के लिए तारीख मिलना काफी मुश्किल है। लेकिन जिनका उपचार पहले से यहां चल रहा है, उन्हें फॉलोअप की वजह से आसानी से तारीख मिल सकती है। लगभग सभी विभागों में फॉलोअप मरीजों के लिए करीब 15 से 20 दिन की वेटिंग है।







