तुष्टिकरण का शुद्धिकरण
मोदी-योगी सरकारों ने मुस्लिम समाज के लिए खोले मुसल्लम विकास के रास्ते
मुस्लिम समाज को राष्ट्रवाद की टानिक दे रही है मोदी-योगी सरकारें
नवेद शिकोह
लखनऊ,14 जनवरी। 2016 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने अपने कैंपेन का सेंटर प्वाइंट नारा बनाया था-‘ 27 साल यूपी बेहाल”।
चुनाव से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा समर्थन की आंधी से घबराकर कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से हाथ मिलाकर अपने प्रचार के केंद बिन्दु नारे के चराग को खुद ही बुझा भी दिया। इस कड़वे सच की रौशनी को कांग्रेस जारी भी नहीं रख सकती थी। ईमानदारी से यूपी के 27 सालों का डीएनए टेस्ट किया जाता तो 27 सालों में करीब 18 साल सपा-बसपा की यूपी सरकारों ने जिन खंजरों से उत्तर प्रदेश को घायल कर बेहाल-बदहाल, कमजोर और खोखला कर दिया था उनमें तुष्टिकरण के खंज़र ने सूबे को सबसे ज्यादा ज़ख्म दिये थे।
जातिवाद, भष्टाचार और लूट-खसोट से भी ज्यादा ख़तरनाक साबित हुआ था तुष्टिकरण।
कांग्रेस अपने चुनाव प्रचार में यूपी बेहाल ‘ की सच्चाई का चराग जलाती तो इसकी रौशनी में वो सपा-बसपा से भी ज्यादा निर्वस्त्र हो जाती। 60 वर्षों की हुकूमतों के दौरान कांग्रेस ने देशभर में जितना तुष्टिकरण किया उसके आगे तो सपा-बसपा का तुष्टिकरण बच्चा था।
दरअसल मुस्लिम तुष्टिकरण मुस्लिम समाज के लिए ही ज़हर साबित होता गया। सच्चर कमेटी की रिपोर्ट भी इसकी दलील है। कांग्रेस ने पहले इस समाज को बीमार और कमजोर किया। फिर उसे बीमार बताकर डराया।
मुस्लिम समाज के ख़ास और आम लोगों का कहना है कि कांग्रेस सहित यूपी और अन्य सूबों के क्षेत्रीय राजनीति दलों के मुस्लिम तुष्टिकरण से मुस्लिम समाज को बेहद नुकसान हुआ है।
शिया पर्सनल लाॅ बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना यासूब अब्बास कहते हैं कि तुष्टिकरण बदहजमी जैसा है, जिससे लाभ नहीं केवल हानि ही होती है।
समाजसेविका परवीन आब्दी का मत है कि मुसलमानों को भाजपा से डरा कर अपना उल्लू सीधा करने वाली सियासत अब अंतिम सांसे ले रही हैं। केन्द्र और उत्तर प्रदेश की भय मुक्त भाजपा सरकारों के निष्पक्ष गवर्नेंस से अब मुसलमान धीरे-धीरे भाजपा पर भरोसा करने लगे है।
शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी दावे के साथ कहते है कि अयोध्या मामले में राम मंदिर निर्माण में सहमति देकर आम मुसलमान अयोध्या विवाद को विराम देना चाहता है। देशहित समाज हित के लिये अमन कायम रखने का तकाजा भी यही है। लेकिन हिन्दू-मुसलमान के दरम्यान खाई में ही कुछ सियासी दलों का वजूद है। भाजपा से डराने और मंदिर – मस्जिद विवाद को कायम रखने के लिए चंद मुल्ला-मौलवी और उलमा भाजपा विरोधी दलों के इशारे पर अयोध्या मसले को उलझाये रखने की सुपारी खा रहे हैं।
सेवानिवृत्त फौजी ज़रग़ाम हुसैन भाजपा सरकार की नीतियां की तमाम खूबियों में नैतिक विकास के प्रयासों को सबसे बेहतर मानते है। कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों ने दशकों तक मुसलमानों को अपनी उंगलियों पर नचाने के लिए इन्हें तालीम से महरूम रखने की साजिशें की हैं। राष्ट्रवाद से दूर रख कर अलगाववाद की तरफ अग्रसर करने के प्रयास किये गये हैं। लेकिन अब भाजपा सरकारों ने राष्ट्रवाद की जो अलख जलायी है उसमें मुसलमान खूब रौशन ख्याल होते नजर आ रहे हैं। मदरसों में भी राष्ट्रवाद की गूंज सुनाई देने लगी है। मजहबी इदारों में कौमी तरानों की सदायें सुनाई देने का चलन शुरु करने की पहल को मुस्लिम दानिशवरों नें काबिले तारीफ माना है। क्योंकि इस्लामी शरियत भी अपनी मादर-ए-वतन से मोहब्बत की हिदायत देती है।






