इस बार नवरात्रि 2020 का पर्व बहुत सख्त हिदायतों के साथ मनाया जायेगा। बता दें कि इस बार कोविड -19 कि गाइड लाइन के अनुपालन में सभी सावधानियों को ध्यान में रखना बेहद जरुरी है। मिनिस्ट्री ऑफ़ हेल्थ के दिशा निर्देशों के अनुपालन में यह भी सुनिश्चित करना है कि यदि आप नवरात्र के पूजा पंडाल में जाने कि योजना बना रहे हैं तो फेस मास्क और सैनेटाईजर भी साथ लेकर जाये इसके साथ ही परिवार की सुरक्षा के दो गज की दूरी का पालन भी करें।
इस बार नवरात का त्यौहार वर्ष 2020 में अधिमास (लीपईयर) में पड़ने के कारण पितृपक्ष समाप्त होने के ठीक एक माह बाद मनाया जाने वाला है। इसी के साथ ही साथ कोरोना वायरस की वजह से सम्पूर्ण देश के साथ ही साथ उत्तर प्रदेश में भी अनलॉक के मद्देनज़र इस बार नवरात्र बहुत हर्षोउल्लास के साथ मनना संभव नही होगा तो दूसरी तरफ देश मे लॉकडाउन रहने की वजह से लोगों में आर्थिक परेशानियों के कारण लोगों में नवरात को लेकर वह उत्साह इस बार दुर्गा पूजा के पंडालों में शायद दिखाई न पड़े।
प्रदेश का प्रशासन इस बार इस सामूहिक सामाजिक कार्यक्रम में बहुत सतर्क और अनुसाशन में सख्ती करने के मूड में दिखाई दे रही है यहां तक कि लोगों को सामाजिक दूरी बनाये रखने एवं मुहँ पर मास्क लगाने की भी सख्त हिदायत होगी।
वैसे तो आप सभी जानते हैं कि नवरात्र का त्यौहार हमारे भारतवर्ष में हिंदूधर्मालंबियों के द्वारा मनाया जाने प्रमुख पर्व है। इस दौरान मां दुर्गा के नौ अलग-अलग रूपों की पूजा-अर्चना करने का विधान है। वैसे तो हम हिंदूधर्मालंबियों के मध्य एक वर्ष में चैत्र, आषाढ़, आश्विन और माघ के चार महीनों को मिला कर चार बार नवरात्र होते हैं लेकिन चैत्र और आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक पड़ने वाले नवरात्र लोगों के मध्य बहुत लोकप्रिय हैं।। नवरात्र के बाद से ही हमारे देश मे त्यौहारों के मानने का सिलसिला प्रारम्भ हो जाता है।
बसंत ऋतु में होने के कारण चैत्र नवरात्र को वासंती नवरात्र और शरद ऋतु में होने वाले यानिकि आश्विन मास के नवरात्र को शारदीय नवरात्र भी कहा जाता है। वास्तव में दशहरे के दिन ही नवरात्र मनाया जाता है। नवरात्र के नौ दिनों में दुर्गामां के अलग-अलग शक्ति रुपों की पूजा अर्चना करने का विधान है।
दुर्गा का प्रथम रूप मां शैलपुत्री है, इसके बाद ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्रि मां के नौ रूपों में शक्ति की अलग-अलग रुप हैं। नवरात्र के प्रथम दिन घट स्थापना की जाती है। इसके बाद लगातार नौ दिनों तक मां की पूजा-पाठ कर लोगों द्वारा नौ दिनों का व उपवास भी रख कर देवी की पूजा-अर्चना बड़े ही भक्ति भाव से करते है। दसवें दिन कन्या पूजन करने के पश्चात उपवास भंग किया जाता है और इसी दिन दुर्गा मां की प्रतिमा को पोखर, नदी या गंगा में विसर्जन करने कर लोग बड़े ही हर्षोउल्लास से आपस मे गले मिलते हैं। – प्रस्तुति: जी के चक्रवर्ती







