जब मां दुर्गा ने ली भगवान श्री राम की परीक्षा

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नवरात्र विशेष: विजयदशमी 25 अक्टूबर को

दशहरा त्यौहार भगवान श्री राम की कहानी तो कहता ही है जिन्होंने लंका में 9 दिनों तक लगातार चले युद्ध के पश्चात अंहकारी रावण को मार गिराया और माता सीता को उसकी कैद से मुक्त करवाया। वहीं इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था इसलिये भी इसे विजयदशमी के रुप में मनाया जाता है और मां दुर्गा की पूजा भी की जाती है।

माना जाता है कि भगवान श्री राम ने भी मां दुर्गा की पूजा कर शक्ति का आह्वान किया था। भगवान श्री राम की परीक्षा लेते हुए पूजा के लिये रखे गये कमल के फूलों में से एक फूल को गायब कर दिया। चूंकि श्री राम को राजीवनयन यानि कमल से नेत्रों वाला कहा जाता था इसलिये उन्होंने अपना एक नेत्र मां को अर्पण करने का निर्णय लिया ज्यों ही वे अपना नेत्र निकालने लगे देवी प्रसन्न होकर उनके समक्ष प्रकट हुई और विजयीहोने का वरदान दिया।

माना जाता है इसके पश्चात दशमी के दिन प्रभु श्री राम ने रावण का वध किया। भगवान राम की रावण पर और माता दुर्गा की महिषासुर पर जीत के इस त्यौहार को बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के रुप में देशभर में मनाया जाता है। देश के अलग अलग हिस्सों में इसे मनाने के अलग अंदाज भी विकसित हुए हैं।

कुल्लू का दशहरा देश भर में काफी प्रसिद्ध है तो पश्चिम बंगालए त्रिपुरा सहित कई राज्यों में दुर्गा पूजा को भी इस दिन बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।

कब है दशहरा:

पचांग के अनुसार इस वर्ष दशहरा का त्योहार 25 अक्टूबर 2020 को मनाया जाएगा। इस दिन सूर्य तुला राशि और चंद्रमा मकर राशि में होगा। धनिष्ठा नक्षत्र भी इसी दिन रहेगा। दीवाली से ठीक 20 दिन पहले दशहरा का पर्व आता है। इस बार नवरात्र आठ दिनों में ही बीत जाएंगे। अष्टमी और नवमी तिथियों को दुर्गा पूजा एक ही दिन होगी। 24 अक्टूबर को सवेरे 6 बजकर 58 मिनट तक अष्टमी है और उसके बाद नवमी लग जाएगी। ऐसे समझें दशहरे में बदलाव वर्ष 2020 में दशमी 26 अक्टूबर की मनाई जाएगी। जबकि दशहरा 25 अक्टूबर रविवार को पड़ रही है। इसका कारण यह है कि दशहरा पर्व अश्विन माह के शक्ल पक्ष की दशमी तिथि को अपराह्न काल में मनाया जाता है। इस काल की अवधि सूयोदय के बाद दसव मुहूर्त से लेकर बारहवें मुहूर्त तक की होती। अगर दशमी तिथि दो दिन पड़ती है चाहे अपराह्न काल में हो या नाद्ध लेकिन श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में पड़े तो विजयादशमी का त्यौहार दूसरे दिन मनाया जाएगा।

अगर दशमी तिथि दोनों दिन पड़े लेकिन अपराह्न काल केवल पहले दिन हो तो उस स्थिति में दूसरे दिन दशमी तिथि पहले तीन मुहूर्त तक विद्यमान रहेगी और श्रवण नक्षत्र दूसरे दिन के अपराह्न काल में व्याप्त होगा तो दशहरा पर्व दूसरे दिन मनाया जाएगा। इसमें फिर श्रवण नक्षत्र की किसी भी परिस्थिति को खारिज कर दिया जाएगा। ऐसे में इस बार जहां 25 अक्टूबर को नवमी सुबह 7.41 तक ही रहेगी।

वहीं इसके बाद दशमी शुरु हो जाएगी। जबकि यह दशमी तिथि 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजे तक ही रहेगी। जिसके चलते दशहरा 2020 यानि विजयदशमी 2020.25 अक्टूबर को ही मनाया जाएगा। जबकि दुर्गा विसर्जन 26 अक्टूबर को होगा।

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