विनायक राजहंस
प्रकृति के खजाने में पेड़-पौधों के रूप में असंख्य मोती होते हैं, अनंत मणियां होती हैं… हमें सभी के बारे में जानकारी नहीं है। दुनिया भर के विज्ञानी दिन-रात इस संधान में लगे रहते हैं कि ज्यादातर पेड़-पौधों के बारे में मालूमात हो जाए।
जानने के इस क्रम में मैंने भी जानना चाहा कि यह कौन सा फल है, जो मेरे हाथ में है? मुकामी बाशिंदों ने बताया कि इसे “अकोहर” कहते हैं और यह फल जहरीला होता है। बस इससे ज्यादा इस फल के बारे में ना वे बता पाए और न ही मैं जान पाया।
हमारे यहां गंगा नदी के कछार में यह पेड़ बहुतायत में पाया जाता है, पर अभी तक की जानकारी के मुताबिक इसका उपयोग इंसान के लिए कोई नहीं। कथित रूप से जहरीला होने का कारण तो उपयोग के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता। हां, इसके फल जमीन पर कई दिनों तक बिछे रहते हैं और पड़े-पड़े सड़ जाते हैं। जाहिर है, इसे जानवर भी नहीं खाते।
वैसे प्रकृति के आंचल में बहुत सी ऐसी वनस्पतियां हैं, जो मानव के लिए अनुपयोगी हैं… या यह भी हो सकता है कि हम उसके गुण धर्म के बारे में जानते ही ना हों!
हालांकि, कोई वनस्पति हमारे उपयोग में आए ना आए, प्रकृति के लिए उपयोगी तो होती ही है। वह धरती का संतुलन बनाए रखती है, मृदा अपरदन रोकती है, छाया भी दे सकती है और सबसे बढ़कर ऑक्सीजन रिलीज करती है।
सभी पेड़-पौधों के फल हमारे काम आएं, यह भी जरूरी नहीं। प्रकृति का काम है फल देना, सो वह देती है और देती जा रही है।
फिर भी इस फल के बारे में और जानने की चाह है… यह सवाल अभी भी तारी है कि-
इदम् किम् फलम्?







