उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने 20 पेज की विस्तृत रिपोर्ट आयोग को सौंपकर पेश किये चौंकाने वाले आकंड़ें कहा 15 प्रतिशत अविलम्ब बिजली दरों में कमी
लखनऊ, 08 जुलाई, 2020: नियामक आयोग में नोयडा पावर कम्पनी(NPCL) द्वारा वर्ष 2020-21 के लिये दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्कता व बिजली दर सहित टूअप याचिका पर आज सार्वजनिक सुनवाई आयोग अध्यक्ष श्री आर पी सिंह व सदस्यगण श्री कौशल किशोर शर्मा एवं श्री विनोद कुमार श्रीवास्तव की उपस्थित में सम्पन्न हुयी। इस बात की जानकारी उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने एक मीडिया रिलीज़ जारी कर दी।
सर्वप्रथम नोयडा पावर कम्पनी के एमडी श्री आर सी अग्रवाल ने अपने प्रस्ताव पर प्रजेन्टेशन करते हुये वर्तमान लागू टैरिफ को आगे भी लागू रखने की मांग उठायी। उपभोक्ता परिषद के सवालों के सामने NPCL एनपीसीएल की बोलती बंद हो गयी। इस मामले को आयोग गंभीरता से लिया। आयोग चेयरमैन ने मामले की गंभीरता को देखते हुये आयोग के उच्चाधिकारियों की सुनवाई खत्म होते ही बैठक बुला ली। आयोग चेयरमैन ने कहा मामला गंभीर है पूरी जाॅंच पडताल होगी। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जायेगा।
इसके बाद प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुये उप्र राज्य विद्युत उपभेाक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने एक विस्तृत 20 पेज की रिपोर्ट आयोग में प्रस्तुत करते हुये कहा कि नोयडा पावर कम्पनी की वर्तमान लागू दर में 15 प्रतिशत की कमी होनी चाहिये और जल्द से जल्द नोयडा पावर कम्पनी की कारगुजारी को देखते हुये उसके लाइसेंस को अविलम्ब निरस्त किया जाना चाहिये।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से NPCLएनपीसीएल द्वारा वर्तमान 8 प्रतिशत लाइन हानियों को गलत तरीके से लाभ लेने के लिए बढाकर 9 प्रतिशत प्रस्तावित किया गया, वह गलत है केवल 5 प्रतिशत लाइन लॉस माना जाय । बडे पैमाने पर कैपेक्स में विद्युत नियामक आयोग द्वारा तय दरों के विपरीत जाकर 100 से 500 प्रतिशत तक अधिक दरों पर ट्रांसफार्मर सहित इत्यादि उपभोक्ता सामग्री की खरीद की गयी।
उन्होंने कहा कि फिजूलखर्ची का आलम यह है कि उपभोक्ताओं की टैरिफ में पासआन करके एननपीसीएल के अधिकारी मर्सडीज बेन्च खरीद कर चल रहे हैं और भी अनेकों मंहगी गाडियाॅं खरीदी गयी जो जाॅंच का मामला है। शार्ट टर्म में 251 करोड की बिजली जिसमें नाममात्र आयोग से स्वीकृत ली गयी और ज्यादातर बिना स्वीकृत के खरीद की गयी। NPCLएनपीसीएल बिल्डरों से साॅंठ – गाॅंठ करके उन्हें कम भार पर मल्टीस्टोरी में कनेक्शन दे देता है फिर बिल्डर उपभोक्ताओं को ज्यादा भार पर कनेक्शन देकर लाभ कमाते हैं और वहाॅं की जनता ब्रकडाउन में फंसी रहती है। सिंगल प्वाइंट के मामले में बिल्डरों के साथ एनपीसीएल मिला हुआ है और बिल्डर उपभोक्ताओं का लगातार उत्पीडन कर रहे हैं।
NPCLएनपीसीएल को 10 करोड से ऊपर सभी खर्चों का अनुमोदन आयोग से लेना था लेकिन अनेकों मामलों में अनुमोदन नही लिया गया और ज्यादातर मामलों में स्कीम को टुकड़ों में करके आयोग के अनुमोदन से बचा गया। उदाहरण के लिये 25 केवीए का ट्रांसफार्मर जो आयोग ने 56780 की दर तय की। NPCL ने उसे 2 लाख 56 हजार में खरीदा। इसी प्रकार 100 केवीए का ट्रांसफार्मर आयोग ने 136710 दर तय की लेकिन NPCL ने उसे 17 लाख में खरीदा। यह पूरा गोलमाल और घोटाला है। इसकी जाॅच बहुत ही जरूरी है। इसी प्रकार से अन्य सामग्री की दरें भी बहुत ज्यादा है।
आगे उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा NPCLएनपीसीएल क्षेत्र में पहले जो उपभोक्ता शिकायत 23.6 प्रतिशत थी अब वह बढकर 30.6 प्रतिशत हो गयी। वहाॅं के गाॅंव को 10 से 12 घण्टे बिजली मिलती है और कागजों मंे 18 घण्टे की बात की जाती है। एनपीसीएल की कारगुजारी का बडा मामला यह है कि वह पश्चिमाॅंचल विद्युत वितरण निगम के अन्दर घुसकर 2 विश्वविद्यालयों और 1 बडे बिल्डर को एचटी का कनेक्शन दे दिया और वहीं दूसरी ओर अपने क्षेत्र के अन्तर्गत 4 गाॅंव रोजा, जलालपुर, इटेरा और पथवारी को बिजली नही दि अन्ततः फिर पश्चिमाॅंचल विद्युत वितरण निगम को बिजली देनी पडी। एनपीसीएल ने बैंकिंग की 200 मिलियन यूनिट व एक्सचेंज की 22 मिलियन यूनिट कुल लगभग 86 करोड में बेचकर लाभ कमाया। प्रमुख सचिव ऊर्जा ने वर्ष 2018 में एनपीसीएल को गाॅंव मेें कम विद्युत आपूर्ति करने पर लाइसेंस की शर्तों का उलंघन माना फिर आगे कार्यवाही क्यों नही की गयी। सरकार एनपीसीएल की अनेकों जाॅंच करा रही है ऐसे में उनके लाइसेंस को निरस्त कर अविलम्ब सरकार को एनपीसीएल टेकओवर कर लेना चाहिये। सुनवाई में पावर कारपोरेशन एनपीसीएल सहित आयोग के अनेकों उच्चाधिकारियों ने भाग लिया। उपभोक्ता श्री रमाशंकर अवस्थी ने भी अपनी बात रखी।







