मेरठ से प्रयागराज तक 594 किमी का मेगा कॉरिडोर
लखनऊ। अब मेरठ से प्रयागराज का सफर महज 6-7 घंटे में पूरा हो जाएगा। 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को नई विकास गति देने जा रहा है। यह सिर्फ एक हाई-स्पीड सड़क नहीं, बल्कि स्पीड, कनेक्टिविटी, निवेश और रोजगार का नया इकोनॉमिक गलियारा है, जो प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर तेजी से ले जाएगा।
12 जिलों को जोड़ेगा आर्थिक धुरी
यह 6 लेन (भविष्य में 8 लेन तक विस्तार योग्य) ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे 36-37 हजार करोड़ रुपये की लागत से पीपीपी मॉडल पर बनाया जा रहा है। यह मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज — इन 12 जिलों को एक आर्थिक धुरी में पिरोएगा।
पश्चिमी UP की औद्योगिक क्षमता को पूर्वांचल की कृषि और श्रम शक्ति से जोड़ते हुए यह एक्सप्रेसवे उत्पादन, प्रसंस्करण और बाजार के बीच की दूरी को dramatically कम कर देगा।
क्या-क्या मिलेगा फायदा?
- समय की बचत: पहले 10-12 घंटे का सफर अब 6-7 घंटे में।
- लॉजिस्टिक्स सस्ता: कृषि उत्पाद, ई-कॉमर्स और इंडस्ट्री को बूस्ट।
- औद्योगिक विकास: फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, एमएसएमई, डेयरी, स्पोर्ट्स गुड्स और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को नई रफ्तार।
- रोजगार: लाखों प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन।
- निवेश आकर्षण: इंडस्ट्रियल नोड्स, वेयरहाउसिंग, कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स हब विकसित होंगे।
इंफ्रास्ट्रक्चर की मजबूत नींव
एक्सप्रेसवे पर 2 मुख्य टोल, 19 रैंप टोल, 9 आधुनिक जन-सुविधा केंद्र, 960 मीटर लंबा गंगा ब्रिज और 720 मीटर रामगंगा ब्रिज जैसी बड़ी इंजीनियरिंग संरचनाएं बनाई गई हैं। 120 मीटर राइट ऑफ वे भविष्य में और विस्तार की गुंजाइश रखता है।
गंगा एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश को इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन ग्रोथ का नया चेहरा दे रहा है। जहां गाड़ियां दौड़ेंगी, वहीं सपने, अवसर और आर्थिक समृद्धि भी फर्राटा भरेंगी।







