देवनानी का पलड़ा भारी,भदेल की आस नहीं हुई पूरी, संन्यास जैसे कमेंट भी रहे चर्चा में
ओम माथुर
चलिए, अजमेर शहर भाजपा की कार्यकारिणी की घोषणा हो गई। कार्यकारिणी में जाहिर है विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के सर्मथकों को ज्यादा तवज्जो मिली है। अध्यक्ष रमेश सोनी तो खुद ही उनके झंडाबरदार हैं। दक्षिण की विधायक अनिता पटेल के समर्थकों को कम जगह मिली है। सांसद भागीरथ चौधरी के डिब्बे भी कार्यकारिणी में जोड़े गए हैं, तो संघ के इशारे पर भी कुछ नेता शामिल किए गए हैं। सोशल मीडिया पर भी कार्यकारिणी को लेकर चर्चा है। दो कमेंट खूब चल रहे हैं। पहला, भाजपा में भी चमचों की नई खेप आ गई है और दूसरा ,कुछ लोगों को तो संन्यास और पोते-पोती खिलाने की उम्र में पद मिला है। अब कौन किसका चमचा है, पता नहीं। हम तो सभी को सर्मथक ही मानते है। हां, चमचों और सर्मथकों में इतना फर्क जरूर होता है कि चमचा नेता का पर्सनल होता है। वह सुबह से शाम तक हाजिरी में रहता है। उसकी निष्ठा पार्टी से ज्यादा अपने नेता के प्रति होता है। वह, बस उसी का होता है। अपने आका के दुश्मन उसके दुश्मन होते हैं और आका के दोस्त उसके दोस्त। आका के गुणगान ही उसका काम होता है। जबकि सर्मथक नेता को नहीं, पार्टी के प्रति निष्ठावान और समर्पित होता है। सभी नेता उसके लिए बराबर होते है। वह सभी से सम्पर्क में रहता है। लेकिन इस तरह के नेता-कार्यकर्ता अब किसी पार्टी में नहीं पाए जाते हैं। अब कार्यकर्ताओं और छोटे नेताओं की पहचान पार्टी में गुटों से होती है। अब भाजपा कार्यकारिणी में कौन किसे किसका चमचा और कौन सर्मथक लगता है, ये अपनी-अपनी सोच और समझ है।
अजमेर शहर जिस तरह दो विधानसभा में बंटा हुआ है। उसी तरह भाजपा का संगठन भी दो हिस्सों में बंटा हैं। किशनगढ़ के शहर जिला में शामिल होने और वहां से खुद सांसद भागीरथ चौधरी के होने के कारण त्रिकोण बन सकता था। लेकिन चौधरी संतोषी स्वभाव और केंद्रीय मंत्री पद के आनंद में संगठन में दखल नहीं देते। जो मिल गया, वही ठीक है। अजमेर में मामला अलग है। दक्षिण की विधायक अनिता भदेल सार्वजनिक रूप से आरोप लगाती रही है कि रमेश सोनी शहर भाजपा नहीं अजमेर उत्तर भाजपा के अध्यक्ष ही हैं। सोनी की देवनानी से करीबी और भदेल से दूरी इसे साबित भी करती रही है।
कार्यकारिणी में अध्यक्ष के बाद महामंत्री की ही कद्र होती है। या फिर कोषाध्यक्ष की। कोषाध्यक्ष का पद अभी रिक्त हैं। तीन महामंत्रियों में से एक-एक पद देवनानी व भदेल के खाते में गया। राजेश शर्मा को देवनानी खेमे से और राजेश घाटे को भदेल खेमे से महामंत्री बनाया गया है। किशनगढ़ से किशन बंग तीसरे महामंत्री हैं। कहा जा रहा है उन्हें संघ की दखल से महामंत्री बनाया गया है। आठ उपाध्यक्ष्यों में सतीश बंसल, योगेश शर्मा, दीपेंद्र लालवानी और भारती श्रीवास्तव,देवनानी खेमे से हैं। जबकि इकलौते रविंद्र सिंह जादौन,भदेल खेमे से हैं। जबकि वेदप्रकाश जादौन सांसद के करीबी है। मंत्रियों में हेमंत सांखला, अंकित गुर्जर, भदेल खेमे से और काजल जेठवानी, चंद्रेश सांखला, राधिका सोनी, देवनानी खेमे से हैं। जबकि रामस्वरूप सुंडा और पंकज पहाड़िया को चौधरी ने पद दिलवाया है। बाकी प्रवक्ताओं, संयोजकों के पद भी देवनानी खेमे के हाथ ही ज्यादा आए हैं।
कार्यकारिणी में सबसे हैरतअंगेज नियुक्ति मुख्य प्रवक्ता के रूप में सोमरत्न आर्य की मानी जा रही है। पांच साल पहले एक गंभीर आपराधिक मुकदमा दर्ज होने के बाद वो भाजपा से बाहर भी किए गए थे। लेकिन अब शहर भाजपा की खबरें वही देंगे। आर्य को ये वरदान प्राप्त है कि जो सत्ता में ताकतवर होता है,वह उसके साथ हो जाने की कला जानते हैं। ओंकारसिंह लखावत, अनिता भदेल से होते हुए वो काफी समय से देवनानी के पास मंडरा रहे थे। नतीजा सबके सामने हैं।
यूं भाजपा के नेता सार्वजनिक रूप से एक पद और एक व्यक्ति के सिद्धांत की वकालत करते हैं। लेकिन राष्ट्रीय स्तर से जिला स्तर तक इसकी पालना नहीं की जा सकती है। अजमेर शहर की कार्यकारिणी भी इसका उदाहरण है। यहां कुछ लोगों के पास अब दोहरी-तिहरी जिम्मेदारी हो गई है। जैसे दीपेंद्र लालवानी, बीना टांक,भारती श्रीवास्तव,हेमंत सांखला आदि पार्षद भी है और इन्हें कार्यकारिणी में पदाधिकारी भी बनाया गया है। महामंत्री राजेश शर्मा की पत्नी नलिनी शर्मा और प्रवक्ता बनाए गए दिलावर सिंह चौहान की पत्नी भावना चौहान भी पार्षद है। अध्यक्ष रमेश सोनी भी पार्षद हैं। भारतीय श्रीवास्तव तो पार्षद, उपाध्याक्ष के साथ-साथ महिला मोर्चा की अध्यक्ष भी है। इसके अलावा भी कई पदाधिकारी पहले भी पार्षद और संगठन में रह चुके हैं यानी नए लोगों को कम ही एंट्री मिली है।
बहरहाल, इस साल के अंत में होने वाले नगर निगम के चुनाव यह बताएंगे की कार्यकारिणी से कितने भाजपाई संतुष्ट है और कितने असंतुष्ट। क्योंकि भाजपा के कई नेता और कार्यकर्ता अब निगम चुनाव का इंतजार कर रहे हैं, ताकि निपटाने के काम पर लग सकें। हां, नए बने पदाधिकारियों ने जश्न खूब मनाया। कल सोशल मीडिया पर उनके मालाओं से लदे और नाचते हुए वीडियो खूब देखने को मिले। पदाधिकारी बनने से वंचित एक भाजपाई की इस पर टिप्पणी थी कि सत्ता होने पर संगठन में पद मिलने से भी सभी तरह के विकास के रास्ते खुल जाते हैं। हालांकि अभी मुख्य जश्न तब होगा,जब देवनानी और भदेल दोनों शहर में लौटेंगे। कल तक दोनों बाहर थे और अलग-अलग ज्योर्तिलिंगों के दर्शनों की तस्वीरें उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर थी।







