इस कारण से लोग नहीं खाते हैं सुअर का मांस

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हम सब जानते हैं इस्लाम धर्म में सुअर का मांस खाना मना है तो चलिए आज की न्यूज़ में हम आपको इसका कारण बताने वाले हैं कि मुसलमान सुअर के मांस को क्यों नहीं खाते हैं।

हम उसको बता दें कि सुअर एक ऐसा स्तनधारी जानवर है जिसको पसीना नहीं आता और इसकी वजह यह है कि सुअर के शरीर में पसीने की ग्रंथियों का ना होना. हम आपको बता दें कि पसीना ना आने की वजह से उसकी बॉडी ज्यादा विषैली हो जाती है और सुअर अपने आप को ठंडा रखने के लिए ठंडी मिट्टी या नाले पर लेटे रहते हैं। बता दे कि सुअर की खास बात यह है कि यदि आप सुअर पर किसी भी प्रकार के जहर का प्रयोग उसे मारने के लिए करते हैं. तो उस पर वह जहर काम नहीं करता है क्योंकि सुअर की बॉडी उस जहर से ज्यादा विषैली होती है। हम आपको बता दें कि यदि कोई भी व्यक्ति बफैलो(भेंस) का मीट खाता है तो उसको पचाने में आपको 6 से 7 घंटे का वक्त लगेगा. लेकिन सुअर के मांस को पचने में केवल 3 से 4 घंटे का वक्त लगता है. सुअर का मांस शरीर में जल्दी पचने से इस पर उपस्थित टॉक्सिन नामक जहर हमारे लीवर पर अटैक करता है जिस कारण हमें हार्ट अटैक भी आ सकता है। विदेशों में यह बड़े-बड़े रेस्टोरेंट में सुअर के मांस को पकाने से पहले उस पर एक केमिकल लगाकर धोया जाता है जिससे उस पर उपस्थित टॉक्सिन नामक जहर निकल जाता है. इसके बाद वह खाने योग्य होता है।
तो आप समझ गए होंगे कि मुसलमान या अन्य लोग सुअर के मांस का सेवन क्यों नहीं करते हैं।

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