लखनऊ। एडवोकेट जनरल राघवेन्द्र प्रताप सिंह की सुरक्षा में तैनात सिपाही मनोज कुमार शुक्ला की मौत डूबने से हुयी थी। इसका खुलासा उसकी पीएम रिपोर्ट से हुआ। फिर भी डॉक्टरों ने बिसरा सुरक्षित कर लिया है। उधर डूबने की बात परिजनों के गले नहीं उतर रही। वो इसे हत्या ही मान रहे हैं लेकिन इस सिलसिले में उन्होंने कोई तहरीर नहीं दी है। मनोज की रहस्यमय मौत के बाद कई ऐसे सवाल हैं, जिनका जवाब न तो पुलिस के पास है और न ही उसे सुलझाने में डॉक्टर सफल हो सके। शायद इसीलिए मृतक के भाई विनीत शुक्ला ने जांच की मांग की है।
मूलरूप से अमरोहा निवासी मनोज कुमार सेक्टर-16 इंदिरानगर में पत्नी अलका व दो बेटियों के साथ रहता था। बीते मार्च माह में उसकी तैनाती एडवोकेट जनरल राघवेन्द्र प्रताप सिंह के साथ हुयी थी। शनिवार शाम 5 बजे वो ड्यूटी की बात कहकर घर से निकला था लेकिन रायफल साथ नहीं ले गया। वो शुक्रवार को ड्यूटी से ही घर आए थे लेकिन घर नहीं पहुंचे। उसका मोबाइल भी बंद था। सोमवार को गोमती में शव मिला तो हड़कंप मचा। आनन-फानन में उसे पीएम के लिए भेजा गया। देर रात डॉक्टरों के पैनल ने उसका पोस्टमार्टम किया। जिसके बाद पता चला कि उसकी डूबने से मौत हुयी है। फिलहाल डॉक्टरों ने अन्य वजह जानने के लिए बिसरा सुरक्षित रखा है। पत्नी, बुजुर्ग व परिवार के अन्य लोगों के गले से डूबने से मौत होने की बात नहीं उतर रही। उनकी माने तो ड्यूटी से निकलने के बाद वो नदी के किनारे क्यों गए? जरूर किसी साजिश के तहत उन्हें मारकर नदी में फेंका गया है। अगर ऐसा न होता तो उनकी दोनों आंखे बाहर क्यों निकली रहती? शरीर में खरोच के निशान क्यों होते? वर्दी के बटन कैसे टूटे थे? फिलहाल ऐसे कई सवाल हैं जिनके जवाब घटना के दूसरे दिन भी पुलिस के पास नहीं थे। उनमें अहम बातें ये थीं कि मनोज घर से ड्यूटी के लिए निकले तो नदी के किनारे कैसे पहुंचे? आत्महत्या क्यों की? उसे किसी ने वहां ले जाकर तो नदी में नहीं फेंक दिया? वो अक्सर टैम्पो से ही ड्यूटी पर निकलता था, अगर आत्महत्या की तो सुसाइड नोट क्यों नहीं मिला?







