स्वंय भगवान से बढ़कर है भगवान का नाम: आचार्य प्रभाकर तिवारी

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लखनऊ 30 नवम्बर। विश्वनाथ मन्दिर के 26वें स्थापना दिवस के मौके पर श्रीरामलीला पार्क सेक्टर-’ए’ सीतापुर रोड़ योजना कालोनी में स्थित मन्दिर परिसर में चल रहे श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन गुरूवार को भगवान श्रीकृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया।
इस मौके पर ‘‘चलो देखे नन्द घर लाला हुआ, यदुवंश चन्द्र नन्द घर उजाला हुआ…’’ व ‘‘लल्ला जन्म सुनि आई, यशोदा मैया दे दो बधाई…’’ जैसे भजनों पर वहां मौजूद भक्त झूम उठे। जिसके पश्चात् भगवान श्रीकृष्ण के बाल लीलाओं का वर्णन करते हुये कथाव्यास आचार्य प्रभाकर तिवारी ने कहा कि परब्रह्म परमात्मा ने अपने दिये हुये वचनों को पूरा करने के लिये एंव समस्त जगत के कल्याणार्थ पूतना राक्षसी को बालभाव दिखाकर स्तनपान कराते हुये उसको अपने ही तेज में मिला लिया।
जिस समय पूतना रोती हुई भगवान से प्रार्थना करती है कि हे प्रभु मुझे छोड़ दो तो भगवान कहते है मां जिसे मैं अपनाता हूं उसे छोड़ता नहीं हूं। मानव भगवान ने पूतना से कहा मां मैं दुधमुहां शिशु हूं, दूध पीना मेरी जीविका है। तुमने स्वंय अपना स्तन मेरे मुंह में दिया और मैने पिया, इससे यदि तुम मर जाती हो तो इसमें मेरा अपराध क्या है। ‘‘कहहुं कहां लगि नाम बड़ाई। राम न सकहि नाम गुन गाई।।’’ भगवान के संकीर्तन का महत्व बताते हुये आचार्य प्रभाकर तिवारी ने कहा कि स्वंय भगवान श्रीकृष्ण ने जिस समय पूतना का वध किया उस समय सारे ग्वालवालों ने भगवान के दीघायु होने के लिये भगवान के नाम का संकीर्तन किया। इससे यह सिद्ध होता है कि भगवान का नाम स्वंय भगवान से बढ़कर है।

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