नीतू सिंह/ सुशील कुमार
प्रेमानंद जी महाराज एक ऐसा नाम, जो भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की भक्ति में डूबा हुआ है। उनका भोलाभाला चेहरा, निर्मल भाव और सादगी भरी वाणी लाखों दिलों को छूती है। कम शिक्षा-दीक्षा के बावजूद उनकी भक्ति और प्रेम का ज्ञान इतना गहरा है कि लोग उन्हें सुनते हैं, अनुसरण करते हैं और उनके लंबे जीवन की कामना करते हैं। उनकी हर बात में राधा-राधे की मधुर धुन और प्रेम का संदेश गूंजता है, जो नफरत और अविश्वास के इस दौर में एक अनमोल औषधि बन गया है।
प्रेम का संदेश: राधे-राधे की गूंज
जब समाज नफरत, अविश्वास और अलगाव की आग में जल रहा था, प्रेमानंद जी महाराज ने प्रेम की मशाल जलाई। उनकी शिक्षाएं कोई जटिल दर्शन या गूढ़ रहस्य नहीं, बल्कि साधारण और हृदय को छूने वाली बातें हैं। वे कहते हैं, “खुद को सुधारो, प्रेम पैदा करो, राधे-राधे का जाप करो।” यह सादा मंत्र उनके भक्तों के लिए जीवन का आधार बन गया। चाहे कोई शिकायत लेकर आए, नाराजगी जताए, या दूसरों की बुराई करे, प्रेमानंद जी एक ही जवाब देते हैं, प्रेम करो, संयम रखो, सहनशील बनो।

उनके प्रवचन मजेदार कहानियों या जटिल तर्कों से भरे नहीं हैं। वे न तो विज्ञान की गुत्थियां सुलझाते हैं, न ही दर्शनशास्त्र की व्याख्या करते हैं। फिर भी, उनके शब्दों में वह जादू है, जो लोगों को बांध लेता है। इसका कारण है उनकी सच्चाई और प्रेम की वह शक्ति, जो हर धर्म, हर समुदाय की सीमाओं को लांघकर लोगों को एकजुट करती है।
सबके दिलों में बसे प्रेमानंद जी
प्रेमानंद जी महाराज की तबीयत हाल में कुछ खराब होने की खबर ने उनके अनुयायियों को चिंतित कर दिया। लेकिन इस चिंता के बीच एक अनोखा दृश्य देखने को मिला हिंदू, मुस्लिम, हर मजहब के लोग उनकी सलामती के लिए दुआएं मांग रहे हैं। कई लोग तो अपनी किडनी देने की पेशकश तक कर चुके हैं। यह प्रेम और एकता का वह चमत्कार है, जो प्रेमानंद जी ने अपने सादे जीवन और प्रेम भरे संदेशों से रचा है।

आखिर ऐसा क्या है कि लोग मजहब की दीवारें तोड़कर उनके लिए प्रार्थनाएं कर रहे हैं? इसका जवाब है उनका निश्छल प्रेम। प्रेमानंद जी ने कभी किसी की निंदा नहीं की, कभी किसी को नीचा नहीं दिखाया। उनकी हर बात में प्रेम, त्याग, संवेदना और समर्पण का भाव झलकता है। उन्होंने समाज के फफोलों को प्रेम से भरा और नफरत के जख्मों को अपनी मीठी वाणी से सहलाया।
सादगी में छिपा असाधारण दर्शन
प्रेमानंद जी का दर्शन बेहद सरल है प्रेम ही सब कुछ है। उन्होंने प्रेम को इतना आसान बना दिया कि हर कोई इसे अपना सकता है। चाहे कोई छोटा हो या बड़ा, पढ़ा-लिखा हो या अनपढ़, उनके पास हर सवाल का एक ही जवाब है- राधे-राधे। यह दो शब्द उनके लिए न केवल भक्ति का प्रतीक हैं, बल्कि जीवन जीने का तरीका भी हैं।
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उनके संदेशों में कोई जटिलता नहीं है। वे कहते हैं, “नफरत छोड़ो, प्रेम अपनाओ। दूसरों को बदलने की बजाय खुद को बदलो।” इस सादगी ने ही उन्हें असाधारण बना दिया। जब दुनिया गुस्से और बदले की भावना में डूबी थी, प्रेमानंद जी ने प्रेम की राह दिखाई। उनकी यह राह न केवल व्यक्तिगत जीवन को सुंदर बनाती है, बल्कि समाज को भी जोड़ती है।
विवादों से परे, प्रेम के पुजारी
कुछ लोग प्रेमानंद जी की कुछ बातों से असहमत हो सकते हैं, खासकर महिलाओं या समलैंगिकता जैसे मुद्दों पर। लेकिन उनकी नियत पर कोई शक नहीं करता। वे किसी का अहित नहीं चाहते। समलैंगिकता जैसे संवेदनशील विषय पर भी उन्होंने प्रेम और स्वीकार्यता का रास्ता दिखाया, हर व्यक्ति की प्रकृति का सम्मान करने की बात की। उनकी कमियां कम और अच्छाइयां इतनी ज्यादा हैं कि लोग उन्हें दिल से अपनाते हैं।

सच्चाई, सादगी और प्रेम की विरासत
प्रेमानंद जी महाराज ने यह साबित कर दिया कि सच्चाई, सादगी और प्रेम ही वह ताकत हैं, जो दिलों को जीत सकती हैं। आज जब उनके लिए हर कोने से दुआएं उठ रही हैं, यह साफ है कि उन्होंने जो प्रेम बोया, वही अब लौटकर उनके पास आ रहा है। उनकी शिक्षाएं- प्रेम, संयम, और सहनशीलता- आज के दौर में और भी जरूरी हैं।
वे एक संत हैं, जिन्होंने प्रेम की मिट्टी की खुशबू को फिर से जागृत किया। उनकी राधे-राधे की पुकार ने न जाने कितने दिलों को जोड़ा। आज हम सब उनके लिए यही दुआ करते हैं कि उनकी सादी, सच्ची और प्रेम भरी बातें हमें लंबे समय तक रास्ता दिखाती रहें। प्रेमानंद जी महाराज न केवल एक संत हैं, बल्कि प्रेम का वह दीपक हैं, जो इस अंधेरे भरे युग में भी रोशनी बिखेर रहा है।







