एक बार की बात है भगवान बुद्ध कहीं जा रहे थे। रास्ते में थोड़ी देर के लिए वह एक पेड़ के नीचे रुक गए वह आम का पेड़ था। उस पेड़ पर आम लगे हुए थे। वहां कई बच्चे खेल रहे थे। खेलते -खेलते उनका ध्यान पेड़ पर लगे आम की ओर गया। उन्होंने पत्थर मारकर आम तोड़ने शुरू कर दिया।
आम नीचे गिरने लगे और बच्चे उन्हें उठाकर खाने लगे। अचानक एक लड़के का हाथ चूक गया और एक पत्थर आम में लगने की बजाय भगवान् बुद्ध के सिर में लग गया और खून निकल आया। यह देख कर बच्चे बहुत घबराये, वह बोले अब क्या करें! उनका खेल बंद हो गया।
वे बुद्ध के पास गए और बोले ‘हमसे भूल हो गई है हमें क्षमा कर दीजिए।बुद्ध की आँखों में आंसू भरे थे। उन्होंने बच्चों से कहा तुम लोग परेशान मत हो,जाओ जाकर खेलो। बच्चे बोले आपको चोट आयी है। दर्द से आपकी आँखों में आंसू आ गए है।
मुझे दुख जरूर है पर इस छूट का नहीं। तब किस बात का, एक बच्चे ने पूंछा।
भगवान बुद्ध ने कहा, तुमने पेड़ को पत्थर मारे, उसने तुम्हें आम दिया। मुझे दुख इस बात का है कि पत्थर मारने के बदले मैं तुम्हें कुछ नहीं दे सका। बच्चे इस बात को सुनकर सिर झुका कर चले गए।







