Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Tuesday, April 28
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»नवरात्र

    सिद्धपीठ मां मढ़ीदाई के आंगन में भक्ति और शोर का द्वंद्व

    ShagunBy ShagunMarch 22, 2026 नवरात्र No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    A Duality of Devotion and Tumult in the Courtyard of Siddhapeeth Maa Marhidai
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 568

    नवरात्रि के पावन पर्व पर भाषणबाजी और कोलाहल का रहता अतिक्रमण

    एड.सुनील पाण्डेय/राहुल कुमार

    बबेरू। सिद्धपीठ मां मढ़ीदाई बबेरू का वह पावन आंगन, जो सदियों से आस्था, शांति और अध्यात्म का केंद्र रहा है, आज एक अजीब से अंतर्द्वंद्व से गुजर रहा है। विशेषकर नवरात्रि के पावन पर्व पर, जब प्रकृति की शक्ति अपने चरमोत्कर्ष पर होती है और भक्त अपनी अंतरात्मा की शुद्धि के लिए मां के चरणों में शीश नवाते हैं, तब वहां का वातावरण भक्तिमय मौन के बजाय लाउडस्पीकर के कर्कश कोलाहल में डूबा नजर आता है। यह विडंबना ही है कि जिस स्थान पर साधक को अपने भीतर की आवाज सुननी चाहिए, वहां उसे मेला आयोजकों की अंतहीन भाषणबाजी और विशिष्ट अतिथियों के महिमामंडन को सुनने के लिए विवश होना पड़ता है। आस्था के इस उत्सव में ‘स्व’ से ‘सर्वस्व’ की यात्रा शोर के अवरोधों के कारण कहीं ठहर सी गई है।

    अध्यात्म का मूल आधार ही मौन है। भारतीय मनीषियों ने सदैव इस बात पर जोर दिया है कि ईश्वर से संवाद शब्दों के शोर में नहीं, बल्कि हृदय की गहराइयों में छिपी शांति में होता है। जब एक श्रद्धालु मां मढ़ीदाई के मंदिर की देहरी पर कदम रखता है, तो उसकी एकमात्र अभिलाषा मानसिक शांति और ईश्वरीय सान्निध्य की होती है। किंतु जैसे ही वह ध्यान की अवस्था में जाने का प्रयास करता है, उसके कानों में पड़ने वाली माइक की गूँज उसके एकाग्र मन को छिन्न-भिन्न कर देती है। आयोजकों द्वारा आने-जाने वाले रसूखदार लोगों की प्रशंसा में बिताया गया समय न केवल समय की बर्बादी है, बल्कि उस पवित्र क्षण का अपमान भी है जिसे एक भक्त ने मां की आराधना के लिए सहेज कर रखा था। यह विचारणीय है कि क्या हम अपनी सामाजिक प्रतिष्ठा का प्रदर्शन करने के लिए धर्म के वास्तविक स्वरूप की बलि चढ़ा रहे हैं?A Duality of Devotion and Tumult in the Courtyard of Siddhapeeth Maa Marhidai

    मनोवैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो मंदिर जैसा स्थान ‘हीलिंग सेंटर’ की तरह कार्य करता है, जहाँ मनुष्य अपने दैनिक जीवन के तनावों को छोड़कर सुकून की तलाश में आता है। लेकिन जब वहां उच्च डेसिबल का ध्वनि प्रदूषण होता है, तो वह सुकून तनाव में बदल जाता है। शोर के कारण मस्तिष्क में उत्पन्न होने वाली व्याकुलता भक्त के भीतर उस श्रद्धा भाव को जागृत नहीं होने देती, जो एक सिद्धपीठ की गरिमा के अनुकूल है। विज्ञान भी इस तथ्य की पुष्टि करता है कि निरंतर शोर और अनर्गल ध्वनियाँ न केवल हमारी श्रवण शक्ति को प्रभावित करती हैं, बल्कि रक्तचाप और हृदय की गति पर भी नकारात्मक प्रभाव डालती हैं। भक्ति का अर्थ लयबद्धता है, जबकि यह बेतरतीब भाषणबाजी उस आध्यात्मिक लय को तोड़कर वातावरण में एक प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा भर देती है।A Duality of Devotion and Tumult in the Courtyard of Siddhapeeth Maa Marhidai

    सामाजिक परिप्रेक्ष्य में यह समस्या ‘दिखावे की संस्कृति’ का परिणाम है। मेला आयोजक अक्सर अपनी सक्रियता सिद्ध करने के लिए माइक का सहारा लेते हैं, मानो बिना शोर मचाए सेवा संभव ही न हो। अतिथियों का स्वागत-सत्कार भारतीय संस्कृति का हिस्सा है, लेकिन उसे पूजा-अर्चना और साधना के समय से ऊपर स्थान देना उचित नहीं है। मंदिर किसी व्यक्ति विशेष की प्रशंसा का मंच नहीं, बल्कि मां की महिमा का गान करने का स्थान है। जब आयोजक भक्ति से अधिक अपनी भाषणबाजी को महत्व देने लगते हैं, तो वे अनजाने में ही उस मर्यादा का उल्लंघन कर रहे होते हैं जिसके लिए सिद्धपीठ मां मढ़ीदाई विख्यात है। यह व्यवहार आने वाली पीढ़ियों को भी गलत संदेश देता है कि धर्म मौन साधना नहीं, बल्कि प्रदर्शन का माध्यम है।

    समय आ गया है कि हम अपनी श्रद्धा के स्वरूप पर पुनर्विचार करें। मां मढ़ीदाई के मंदिर की प्राचीनता और उसकी दिव्यता को अक्षुण्ण रखने के लिए कोलाहल मुक्त वातावरण अनिवार्य है। आयोजकों को यह समझना होगा कि उनकी वास्तविक सफलता इस बात में नहीं है कि उन्होंने कितनी बार माइक पर किसका नाम लिया, बल्कि इस बात में है कि उनके प्रबंधन से कितने भक्तों को शांतिपूर्वक मां के दर्शन और ध्यान का अवसर मिला।

    ध्वनि विस्तारक यंत्रों का प्रयोग केवल अत्यंत आवश्यक सूचनाओं के लिए सीमित होना चाहिए। यदि हम अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनना चाहते हैं, तो हमें बाहर के इस बनावटी शोर को शांत करना ही होगा। भक्ति तभी सार्थक है जब वह भीतर की शांति को बढ़ाए, न कि बाहरी व्याकुलता को। मां मढ़ीदाई के चरणों में सच्चा समर्पण वही है, जो बिना किसी दिखावे और शोर के किया जाए।

    Shagun

    Keep Reading

    Relationships are nature's gifts

    रिश्ते उपहार हैं प्रकृति का, सब धर्मों में रिश्ते और उनके कर्तव्यों को रखा गया है सर्वोपरि

    दुःख आता है, लेकिन रुकना जरूरी नहीं

    Sankat Haran Panchmukhi Hanuman Temple Foundation Day: Bhajans Resound Amidst Sundarkand Recitation; Community Feast (Bhandara) Held.

    संकटहरण पंचमुखी हनुमान मंदिर का स्थापना दिवस : सुन्दरकाण्ड पाठ के साथ गूंजे भजन, चला भण्डारा

    The 'Big Bull's' Final Lesson: To truly understand life, one must visit three specific places?

    बिग बुल की अंतिम सीख : जीवन को सही से समझना हो तो तीन जगह जाना चाहिए ?

    Silence in the Face of Provocation Is the True Victory: Osho's Profound Message

    उकसावे पर चुप्पी ही असली जीत: ओशो का गहरा संदेश

    Saffron Bike Ride on Hanuman Jayanti: 'If Hindus unite, the power is unlimited.'

    हनुमान जन्मोत्सव पर भगवा बाइक यात्रा: ‘हिन्दू एकजुट हो तो शक्तियां असीमित’

    Add A Comment
    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Parents have been subjected to such manipulation for a very long time—it is simply that awareness has increased now.

    खेल तो पेरेंट्स के साथ बहुत पहले से होता आया है -जागरूकता अब बढ़ी

    April 28, 2026
    Twists at Every Turn: Murder Mystery ‘M4M’ Keeps Audiences Guessing

    ₹1 लाख की अनोखी चुनौती! मर्डर मिस्ट्री फिल्म ‘M4M’ में ट्विस्ट पर ट्विस्ट

    April 28, 2026
    Brother Digs Up Sister's Grave, Carries Skeleton on His Shoulder to Bank—Just to Withdraw ₹19,300!

    बहन की कब्र खोदकर कंकाल कंधे पर लादकर बैंक पहुंचा भाई! सिर्फ ₹19,300 निकालने के लिए

    April 28, 2026

    ‘टीएमसी-मुक्त बंगाल’ का बड़ा ऐलान! योगी आदित्यनाथ बोले : अब विकास की राह में बाधा डालने वाली TMC को उखाड़ फेंकने का सही समय आ गया

    April 27, 2026
    Hopes Scattered on Scorching Roads: A delivery boy collapsing in the blistering heat is not merely an accident—it is a stark reality of our lives!

    तपती सड़कों पर बिखरी उम्मीदें : चिलचिलाती गर्मी में एक डिलीवरी बॉय का गिरना, सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि हमारी ज़िंदगी की सच्चाई!

    April 27, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading