भारत की प्रथम महिला शिक्षिका माता सावित्री बाई फुले के जन्मदिन पर, विद्या गौतम ने बहुजनों के उत्थान के लिए लिया संकल्प
देश में बहुजनों के स्पेशल बजट को सरकार द्वारा खर्च किये जाने के लिए आंदोलन करेगीं
एक ऐसी महिला जिन्होंने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह, तथा विधवा-विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरूद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया पर उसे हिंदुस्तान ने भुला दिया

इस कार्यक्रम में मुख्य अथिति बहन विद्या गौतम ने जानकारी देते हुए कहा कि हंमे संविधान में समाज के प्रतिनिधित्व व समाज के उत्थान के लिए सामाजिक एवं शैक्षणिक आरक्षण के अलावा स्पेशल कॉम्पोनेन्ट के तहत जो आरक्षण दिया गया उसके बारे में चर्चा की।

उन्होंने कहा कि संवैधानिक अधिकारों के तहत बहुजन समाज को उनकी आबादी के हिसाब सरकार में बजट की व्यवस्था की गई। जिसको कोई भी सरकार बहुजनों के उत्थान के लिए खर्च नही करती हैं। उन्होंने उदाहरण देकर समझाया कि मानों राज्य सरकार उत्तर प्रदेश के लिए 100 करोड़ बजट का प्रावधान किया तो उसमें बहुजन जनसंख्या 21% के आधार पर 21 करोड़ बजट का बहुजनों को मिलेगा लेकिन जानकारी के अभाव में कोई बहुजन इस अधिकार को नही जानता और सरकार इसको खर्च नही करती। इस वजट में गांव और शहर में रहने वाले बहुजनों के विकास पर खर्च किया जाना तय है। गांवों में बहुजन और महिलाओं के लिए उनके मुहल्ले की सड़कें, बिजली, उनको दुधारू पशु, जमीन व उनके लिए चारे तक का प्रबंध इस बजट में किया गया है।
किसी महिला को पशुओं के चारे की लिए खेत या जंगल मे जाने की जरूरत नही है। इन सब व्यवस्था की जिम्मेदारी सरकार की है। उन्होंने बताया कि हमारे देश की अधिकतर बहुजन महिलाओं के साथ जो बलात्कार होता है वो खेत या जंगल में ही होता है क्योकि वो अपने बच्चों को नही बल्कि अपने पशुओं के खाने के लिए चारा व लकड़ियों के लिए अपनी आबरू और जान की बाजी लगा देतीं है।
विद्या गौतम ने कहा है कि वो पूरे देश में बहुजनों के इस स्पेशल बजट को सरकार द्वारा खर्च किये जाने के लिए आंदोलन करेगीं। जिसके लिए उन्होंने पूरे उत्तराखंड में पूर्व हरीश रावत सरकार के खिलाफ आंदोलन चलाया था और सरकार को उनके आगे बहुजनों के उत्थान के लिए बजट खर्च करने को घुटने पर बैठने पर मजबूर कर दिया।

इस कार्यक्रम में कानपुर के प्रसिद्द बहुजन गायक ऋषि बौद्ध ने सावित्री बाई के जीवन और संघर्ष को अपने स्वरीले गीतों से जानकारी दी।
कार्यक्रम का संचालिका बहुजन महिला सामाजिक समिति की संयोजिका किरण बौद्ध ने कार्यक्रम को संचालित करते हुए कहा है कि देश की पहली महिला अध्यापिका व नारी मुक्ति आंदोलन की पहली नेता माता सावित्री बाई फुले ही थी, लेकिन एक ऐसी महिला जिन्होंने उन्नीसवीं सदी में छुआ-छूत, सतीप्रथा, बाल-विवाह, तथा विधवा-विवाह निषेध जैसी कुरीतियां के विरूद्ध अपने पति के साथ मिलकर काम किया पर उसे हिंदुस्तान ने भुला दिया, ऐसी महिला को हमारा शत-शत नमन।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में बहुजन महिला सामाजिक समिति की संयोजक काजल किरण, सन्नो चंद्रा, सरिता गौतम, अंजू लता, कुसुम लता, सुमन (लक्ष्य), और अम्बेडकर विवि के छात्रो ने अहम भूमिका निभायी।

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