प्रदेश में बढ़ती बिजली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिये ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने की मुलाकात सौंपा ज्ञापन
पिछले 5 वर्षों में विद्युत दुर्घटनाओं से 3491 व्यक्तियों की मृत्यु पर ऊर्जामंत्री गम्भीर
लखनऊ, 23 जनवरी। उप्र में बढ़ती बिजली दुर्घटनाओं पर जहां कल उपभोक्ता परिषद ने बड़ा खुलासा किया था। आज इस संवेदनशील मुद्दे पर उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा से सचिवालय स्थित उनके कार्यालय में मुलाकात कर बढ़ती बिजली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने हेतु वार्ता की और एक ज्ञापन सौंपा।
उपभोक्ता परिषद द्वारा सौंपे गये ज्ञापन में प्रदेश में प्रतिदिन लगभग 3 व्यक्तियों की बिजली दुर्घटना से मृत्यु पर चिन्ता व्यक्त करते हुए पिछले 5 वर्षों के पूरे आंकड़े मा. मंत्री जी को सौंपे गये। जिस प्रकार से प्रदेश में पिछले 5 वर्षों के दौरान 3491 व्यक्तियों की जानें गयी हैं, वह बेहद चिन्ता का विषय है। यह कहना गलत नहीं होगा कि भारतीय विद्युत अधिनियम 1956 के प्राविधानों के तहत यदि बिजली कम्पनियों द्वारा सुरक्षा के व्यापक उपाय किये गये होते तो इस प्रकार की दुर्घटनाएं न होतीं।
ऊर्जा मंत्री द्वारा पूरे मामले को अत्यन्त गम्भीरता से लेते हुए विद्युत दुर्घटनाओं जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अंकुश लगाने के लिये युद्ध स्तर पर बिजली कम्पनियों में भावी कार्य योजना बनाकर कार्य करने के लिये अविलम्ब अध्यक्ष पावर कार्पोरेशन को तुरन्त पूरे मामले पर प्रभावी कार्यवाही करने के लिये अपने अधीनस्थ अधिकारियों को निर्देश दिये गये। मा. मंत्री ने कहा कि हर हाल में विद्युत दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाया जायेगा।
सेफ्टी डिवाइस निकली खराब:
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि केवल वर्ष 2016-17 में 958 व्यक्तियों की जानें गयीं और कुल 1824 घातक विद्युत दुर्घटनाएं हुईं, जिसमें प्रमुख रूप से 170 ऐसे मामले सामने आये जिसमें सेफ्टी डिवाइस कार्यक्षम नहीं थी। इसी प्रकार 146 ऐसे मामले सामने आये जिसमें स्टे वायर में इन्सुलेटर/अर्थ न होना पाया गया। 172 ऐसे मामले सामने आये जिसमें मेटल सर्पोट ओवर हेड लाइनों की भली भांति अर्थिंग नहीं थी। 158 ऐसे मामले सामने आये जिसमें बाइन्डिंग वायर का टूटना मुख्य कारण था।
196 ऐसे मामले सामने आये जिसमें क्षतिग्रस्त इन्सुलेशन/इन्सुलेटर का टूटना था। 61 ऐसे भी मामले चिन्हित किये गये जिसमें लाइनों पर अनाधिकृत रूप से चढ़कर कार्य किया गया और 101 ऐसे मामले चिन्हित हुए जिसमें ओवर हेड कन्डक्टर की जमीन से ऊंचाई कम थी। 91 मामलों में केयरलेस वर्किंग और 76 मामलों में बिना सुरक्षा साधन के कार्य करने का मामला उजागर हुआ था। निश्चित तौर पर यदि विद्युत अधिनियम 1956 के द्वारा बनाये गये मानकों का पालन बिजली कम्पनियों द्वारा किया गया होता तो इस प्रकार की दुर्घटनाएं घटित न होतीं।
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