‘राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी दिवस‘ पर संघर्ष समिति का ऐलान, आर्थिक रूप से कमजोर इस कार्य में लगे किसी भी परिवार के छात्र को उच्च शिक्षा व तकनीकी शिक्षा के लिये आर्थिक मदद करेगी संघर्ष समिति

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  • पूरे प्रदेश में भूप सिंह की शहादत को याद कर संघर्ष समिति ने मनाया ‘‘सफाई कर्मचारी दिवस‘‘।
  • संघर्ष समिति ने सफाई कार्मिकों के हित में 4 प्रस्ताव पास सरकार से उठायी मांग, सफाई कार्मिक की कार्यस्थल पर मृत्यु पर दिया जाये कम से कम 50 लाख मुआवजे की मांग।
  • पूरे देश में आज भी 12522 लोग मैला ढोने का कर रहे हैं काम, जिसमें 9822 महिलायें सिर्फ उप्र में आज भी कर रही हैं काम, जो दुर्भाग्य पूर्ण एवं स्वच्छता अभियान पर बड़ा प्रश्न।
राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी दिवस के अवसर पर आज आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र के तत्वावधान में पूरे प्रदेश में भूप सिंह की शहादत को याद करते हुए सफाई कर्मचारी दिवस मनाया गया। उसी क्रम में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति,उप्र संयोजक मण्डल द्वारा भी भूप सिंह को याद करके सफाई कार्मिकों के लिये अनेकों प्रस्ताव पास किये गये। गौरतलब है कि वर्ष 1957 में दिल्ली में म्यूनिसिपल कमेटी ने अपनी मांगों को लेकर हड़ताल शुरू किया था, जिसको दबाने के लिये 31 जुलाई आज ही के दिन बस्ती में फायरिंग कर दी और उसमें भूप सिंह की हत्या हो गयी थी। उसके बाद से ही आज का दिन सफाई कर्मचारी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
संघर्ष समिति ने सफाई कार्मिकों के हितों में 4 प्रस्ताव पास किये जिसमें सफाई के दौरान सफाई कर्मी की मृत्यु पर सरकार द्वारा अविलम्ब 50 लाख रूपये मुआवजा दिया जाये, प्रत्येक सफाई कार्मिक को 25 प्रतिशत विशेष भत्ता दिया जाये, सफाई कार्मिकों के बैकलाग को अविलम्ब पूरा किया जाये, सभी विभागों में सफाई कार्मिकों को संविदा के बजाय नियमित नियुक्ति प्रदान की जाये। संघर्ष समिति के नेताओं ने आज यह ऐलान किया है कि बाबा साहब पे बैक टू सोसाइटी के तहत सफाई कार्मिक/इस कार्य में लगे आर्थिक तंगी के चलते यदि कोई भी अपने बच्चों को उच्च शिक्षा एवं तकनीकी शिक्षा दिलाना चाहता है और नहीं दिला पा रहा है तो उसको आर्थिक मदद संघर्ष समिति द्वारा की जायेगी।
आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति, उप्र के संयोजकों अवधेश कुमार वर्मा, डा. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, अजय कुमार, अन्जनी कुमार, प्रेम चन्द्र, अजय चैधरी, अजय धानुक व तुलसी ने कहा कि जहां देश में स्वच्छता अभियान जोर शोर चल रहा है वहीं दूसरी ओर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय द्वारा जारी एक रिर्पोट में पूरे देश में अब भी 12522 लोगों की पहचान की गयी है, जो मैला ढोने में लगे है। जिनमें 80 प्रतिशत महिलाएं है, जो मुख्य रूप से उप्र की है और उनकी संख्या 9882 है। जो बहुत ही चिन्ता का विषय है। इसी प्रकार वर्ष 2014 की एक रिर्पोट में डाउन द ड्रेन के मुताबिक सिर्फ दिल्ली में 1 साल में 100 से ज्यादा सफाई कर्मचारियों की नालों और सीवर टैंकों की सफाई के दौरान मृत्यु हुई है, जो बहुत ही दुर्भाग्य पूर्ण है।

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