पावर कारपोरेशन ने बिजली महंगी का प्रस्ताव नियामक आयोग को सौंपा, ग्रामीण के साथ शहरी उपभोक्ताओं को भी लगेगा जोर का झटका

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  • योगी सरकार के इशारे पर पावर कारपोरेशन ने ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में 260 से 350% वृद्धि का दिया प्रस्ताव ग्रामीण अनमीटर्ड किसानों की दरों में 60% वृद्धि का प्रस्ताव घरेलू शहरी विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 12%, लघु व भारी उद्योग में कोई वृद्धि नही।
  • वृद्धि प्रस्ताव दाखिल होते ही उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने आयोग अध्यक्ष व सदस्य से की मुलाकात कहा प्रदेश को लालटेन युग में जाने से बचायें और प्रस्तावित वृद्धि का करें खारिज
  • अब तक के इतिहास में ग्रामीण व किसानों की इतनी बडी वृद्धि नही हुयी प्रस्तावित
  • पावर कारपोरेशन ने कुल औसत वृद्धि 22.66 प्रतिशत बताया जो अब की सबसे बडी वृद्धि है

लखनऊ 8 अगस्त। योगी सरकार के इशारे पर उप्र पावर कारपोरेशन द्वारा आज विद्युत नियामक आयोग में प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की श्रेणीवार बिजली दरों में व्यापक बढोत्तरी का प्रस्ताव सौंप दिया है। सबसे बडा चैंकाने वाला मामला यह है कि प्रदेश के ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली दरों में लगभग 260 से 350 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है वहीं ग्रामीण मीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है जहाॅं शहरी घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में लगभग 12 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित वहीं प्रदेश के अनमीटर्ड किसानों की दरों मे लगभग 60 प्रतिशत वृद्धि प्रस्तावित हैं वहीं दूसरी ओर छोटे व भारी उद्योगों की दरों में कोई भी वृद्धि प्रस्तावित नही है। अब तक के इतिहास में ग्रामीण व किसानों की इतनी बडी वृद्धि कभी नही प्रस्तावित हुयी।

पावर कारपोरेशन द्वारा समस्त श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में लगभग औसत 22.66 प्रतिशत की वृद्धि प्रस्तावित की गयी है। बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि की भनक लगते ही उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने नियामक आयोग अध्यक्ष श्री देश दीपक वर्मा व सदस्य श्री एस के अग्रवाल से मुलाकात कर पावर कारपोरेशन के प्रस्तावित वृद्धि को खारिज करने की मांग की और प्रदेश को लालटेन यूग से बचाने की मांग उठायी और कहा कि यह वृद्धि सिद्ध करती है कि पावर कारपोरेशन पूरी तरह उपभोक्ता विरोधी कार्यवाही में लगा है।

उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कारपोरेशन द्वारा ग्रामीण अनमीटर्ड विद्युत उपभोक्ताओं की मौजूदा 180 प्रति किलोवाट प्रति माह को 650 प्रति किलोवाट प्रति माह प्रस्तावित किया गया है वहीं 2 किलोवाट के ऊपर मौजूदा 200 प्रति किलोवाट प्रति माह को रू0 800 प्रति किलोवाट प्रति माह प्रस्तावित किया गया है। इसी प्रकार ग्रामीण मीटर्ड विद्युत उपभोक्ता जो अभी 50 रू0 प्रति किलोवाट प्रति माह व रू0 2.20 प्रति यूनिट देते थे अब उन्हें 85 रू0 प्रति किलोवाट प्रति माह व 150 यूनिट तक रू0 4.40 प्रति यूनिट व 151 से 300 यूनिट तक रू0 4.95 प्रति यूनिट व 500 यूनिट के ऊपर रू0 6.20 प्रति यूनिट प्रस्तावित किया गया है। उसी प्रकार प्रदेश के ग्रामीण अनमीटर्ड किसान जो अभी तक 100 रू0 प्रति बीएचपी प्रति माह देते थे अब उनका रू0 160 प्रति बीएचपी प्रति माह प्रस्तावित किया गया है। उसी प्रकार मीटर्ड किसानों की दरों में भी व्यापक वृद्धि प्रस्तावित की गयी है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि शहरी विद्युत उपभोक्ताओं के मौजूदा फिक्स चार्ज 90 रू0 प्रति किलोवाट प्रति माह को 100 रू0 प्रति किलोवाट प्रति माह व 150 यूनिट तक जो अभी 4.40 प्रति यूनिट था उसे रू0 4.90 प्रति यूनिट जो 151 से 300 के बीच रू0 4.95 प्रति यूनिट था उसे रू0 5.40 प्रति यूनिट जो अभी 301 से 500 रू0 5.60 प्रति यूनिट था अब उसे रू0 6.20 प्रति यूनिट व उसी प्रकार 500 से ऊपर जो अभी 6.20 प्रति यूनिट था उसे रू0 6.70 प्रति यूनिट प्रस्तावित कर दिया गया है। लाइफलाइन विद्युत उपभोक्ताओं की दरे वही रखी गयी हैं लेकिन उनकी 150 यूनिट को घटाकर 100 यूनिट पर सीमित कर दिया गया है।

उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि बडे दूर्भाग्य की बात है कि पावर कारपोरेशन द्वारा अपने प्रस्ताव में यह लिखा गया है कि औसत वृद्धि तो 42 प्रतिशत प्रस्तावित हो रही थी जिससे उपभोक्ताओं को शाक लगता इसलिये औसत वृद्धि 22.66 प्रतिशत कर दी गयी है । सवाल यह उठता है कि सपा सरकार के कार्यकाल में 5 वर्ष में कुल लगभग 50 प्रतिशत औसत वृद्धि की गयी और वहीं भापजा के योगी सरकार के कार्यकाल में पहले साल ही किसानों व गाॅंव की जनता को लालटेन युग में पहुचाने की साजिश की गयी है।