सरकारी विभागों पर सबसे ज्यादा 8853 करोड़ का विद्युत बकाया: उपभोक्ता परिषद

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  • उपभोक्ता परिषद ने सरकार से की मांग बकाया विभाग को दिलाकर ग्रामीण व किसानों की व्यापक प्रस्तावित विद्युत दर वृद्धि पर लगाया जा सकता है विराम। 
  • दिल्ली में उदय स्कीम की मानीटरिंग कमेटी की बैठक में बकाये पर हुई गहन चर्चा।
  • उपभोक्ता परिषद का बड़ा आरोप छोटे बकायेदारों का होता है उत्पीड़न, बड़े सरकारी विभागों के बकाये पर कार्यवाही क्यों नहीं?
  • उपभोक्ता परिषद का बड़ा खुलासा, देश के अनेकों राज्यों की तुलना में उप्र के सरकारी विभागों पर सबसे ज्यादा 31 मार्च,2017 तक रू0 8853 करोड़ का बकाया।
प्रदेश के ग्रामीण व कृषि क्षेत्र के विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में पावर कार्पोरेशन द्वारा 260 से 350 प्रतिशत प्रस्तावित वृद्धि पर उ0 प्र0 राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बड़ा सवाल खडा करते हुए कहा कि पूरे प्रदेश में वितरण ट्रान्सफार्मर्स की कमी के चलते लम्बे समय से जले ट्रान्सफार्मर नहीं बदले जा रहे हैं और उस पर ध्यान न देकर बिजली दर बढ़ोत्तरी की बात हो रही है। वहीं दूसरी ओर पावर कार्पोरेशन द्वारा चलाये जा रहे बकाया वसूली अभियान में जहां आम उपभोक्ता का छोटे से छोटे बकाये पर कनेक्शन काट दिया जाता है, परन्तु सरकारी विभागों में करोड़ों बकाया के बावजूद भी उन पर कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं हो पाती। आज यदि सरकारी विभागों का बकाया वसूल लिया जाये तो आसानी से बिजली कम्पनियों की खराब वित्तीय स्थिति में सुधार हो सकता है और घरेलू ग्रामीण उपभोक्ताओं की बिजली दर बढ़ोत्तरी भी टाली जा सकती है। विगत 2 दिन पूर्व उदय स्कीम की दिल्ली में 8वीं मानीटरिंग कमेटी की मीटिंग में देश के अनेकों राज्यों के वित्तीय मानकों जिसमें एक महत्वपूर्ण मुद्दे सरकारी बकायों पर जब चर्चा हुई तो स्थिति काफी चैकाने वाली थी, जो निम्नानुसार देखी जा सकती हैः
राज्य                           31 मार्च, 2017 तक सरकारी विभागों पर बकाया
उत्तर प्रदेश                                             रू0 8853 करोड़
तेलंगाना                                               रू0 3561 करोड़
महाराष्ट्र                                                रू0 3364 करोड़
आन्ध्र प्रदेश                                           रू0 2828 करोड़
केरल                                                   रू0 2609 करोड़
जम्मू कश्मीर                                          रू0 1868 करोड़
कर्नाटक                                               रू0 1880 करोड़
बिहार                                                  रू0  610 करोड़
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि उप्र में सरकारी विभागों में हमेशा करोड़ों का बकाया रहता है, उनके कनेक्शन भी काटे जाते हैं और सिर्फ कोरे आश्वासन के बाद कुछ ही घण्टों में कनेक्शन जोड़ दिये जाते हैं। उप्र सरकार चाहे तो बजटीय प्राविधानों के अनुसार सभी विभागों का एक मुश्त बकाया पावर कार्पोरेशन को दिलाया जा सकता है। सही मायने में पूरे प्रदेश के सभी विभागों का बकाया वर्तमान माह तक निकाला जाये तो यह लगभग रू0 9000 करोड़ से अधिक हो सकता है। जिस प्रकार से विगत दिनों पावर कार्पोरेशन द्वारा ग्रामीण विद्युत उपभोक्ताओं की दरों में सैकड़ों गुना बढ़ोत्तरी प्रस्तावित की गयी है, निश्चित तौर पर उप्र सरकार को हस्तक्षेप करते हुए बढ़ोत्तरी प्रस्तावित को खारिज कराकर सरकारी विभागों के बकाया को विभाग को दिलाकर आम जनमानस को राहत देनी चाहिए।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि यह बड़े दुर्भाग्य की बात है कि उप्र में सरकारी विभागों का बकाया बढ़ता रहता है और बिजली कम्पनियां चाहकर भी कुछ नहीं कर पातीं। वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे विद्युत बकायेदारों को चिन्हित कर उनका उत्पीड़न किया जा रहा है, जो पूरी तरह न्यायोचित नहीं है।

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