- प्रदेश के अनमीटर्ड हजारों किसानों से नारमेटिव आधार पर की गयी अधिक वसूली को वापस करने हेतु पावर कार्पोरेशन के प्रबन्ध निदेशक ने अन्ततः सभी बिजली कम्पनियों को भेजा निर्देश और बिलिंग साफ्टवेयर में भी संशोधन करने का दिया आदेश
- कार्पोरेशन प्रबन्धन ने माना अब सभी बिजली कम्पनियों को नियामक आयोग द्वारा अनुमोदित नारमेटिव कन्जम्पशन नार्म ही लागू करना होगा
लखनऊ, 11 मार्च। प्रदेश के हजारों अनमीटर्ड किसानों से सभी बिजली कम्पनियों द्वारा नियामक आयोग द्वारा तय टैरिफ से भिन्न नारमेटिव आधार पर पूरे प्रदेश में करोड़ों रूपया अधिक वसूली के मामले में नियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति की बैठक में लिये गये सख्त फैसले के बाद पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन बैकफुट पर आ गया और अन्ततः पावर कार्पोरेशन की प्रबन्ध निदेशक सुश्री अपर्णा यू0 द्वारा सभी कम्पनियों के प्रबन्ध निदेशकों को यह निर्देश भेजे गये हैं कि सभी एलएमवी 5 यानि की किसानों जिनसे नारमेटिव कन्जम्पशन के आधार पर अधिक वसूली की गयी है। उनकी अधिक वसूल की गयी धनराशि को टैरिफ आदेश के प्राविधानानुसार तत्काल संशोधित कराकर अधिक प्राप्त धनराशि को आगामी बिलों में समायोजित करा दें। प्रबन्ध निदेशक महोदया द्वारा अपने बिलिंग साफ्टवेयर विंग को भी निर्देश देते हुए नियामक आयोग आदेशानुसार अनुमोदित नारमेटिव कन्जम्पशन नार्म के अनुसार परिवर्तन करने के निर्देश भी दिये गये हैं।
गौरतलब है कि प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा गलत तरीके से अनमीटर्ड किसानों जिनसे 5 हार्सपावर पर लगभग रू0 834 वसूल किया जाना था, उनसे नियम विरूद्ध तरीके से नारमेटिव आधार पर रू0 3097 वसूल कर लिया गया था। जिसके सम्बन्ध में उपभोक्ता परिषद की शिकायत पर विद्युत नियामक आयोग द्वारा एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया गया था, जिसमें नियामक आयोग के निदेशक टैरिफ डा. अमित भार्गव, पावर कार्पोरेशन के मुख्य अभियन्ता आरएयू नीरज अग्रवाल व प्रदेश के उपभोक्ताओं की तरफ से उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा को शामिल किया गया था। जिसकी जांच अभी भी चालू है।
किसानों की अधिक वसूली को वापस न करने पर सख्त कदम:
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि नियामक आयोग द्वारा गठित जांच समिति द्वारा विगत 16 फरवरी 2018 को जांच समिति द्वारा बार-बार दिये गये निर्देशों के बावजूद भी बिलिंग साफ्टवेयर में बदलाव न करने व किसानों की अधिक वसूली को वापस न करने पर सख्त कदम उठाते हुए पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन को दोषी अधिकारियों के विरूद्ध उनका उत्तरदायित्व निर्धारित कर कृत कार्यवाही से 15 दिन रिर्पोट तलब की गयी थी, जिसके बाद से पावर कार्पोरेशन में हंगामा मचा था और अंततः कई दौर की बैठकों के बाद पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा अधिक वसूल की गयी धनराशि को किसानों के बिलों में समायोजित करने का निर्णय लिया गया।
पावर कार्पोरेशन द्वारा लिये गये निर्णय में जांच समिति द्वारा जिन 7 हजार 956 किसान जिनके यहां बिना मीटर लगाये फेक मीटर नम्बर डालकर डुप्लीकेट मीटर संख्या के आधार पर नारमेटिव नार्म के तहत अधिक वसूली की गयी थी। उनके मामले में भी पावर कार्पोरेशन प्रबन्धन द्वारा विभिन्न उपभोक्ता श्रेणियों के संयोजनों को ठीक कराने तथा आयोग द्वारा अनुमोदित नारमेटिव कन्जम्पशन नार्म के अनुसार सभी बिजली कम्पनियों को कार्यवाही कर आयोग को सूचित करने का निर्देश भी दिया गया है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जब तक सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं को न्याय नहीं मिल जायेगा तब तक उपभोक्ता परिषद अपनी लड़ाई जारी रखेगा।







