‘वन्देमातरम्’ सम्मान के लिये BJP & Company इसका राजनीतिक इस्तेमाल बन्द करे: मायावती

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‘बीजेपी द्वारा पहले भी चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिये ’वन्देमातरम्’ का इस्तेमाल किया गया और अब इसको अपने एक राजनैतिक नारे के रूप में बदलने का प्रयास किया जा रहा है जो दुर्भाग्यपूर्ण व देश के लिये चिन्ता की बात है ‘


लखनऊ, 12 सितम्बर: बीएसपी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष सुश्री मायावती ने बीजेपी एण्ड कम्पनी तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से प्रेरणादायी ‘वन्देमातरम्‘ गान के उचित आदर-सम्मान को बरकरार रखने के लिये इसके राजनीतिक इस्तेमाल को तत्काल बन्द करने की माँग करते हुये कहा कि बीजेपी नेताओं व इनकी सरकारों की कथनी व करनी में ज़मीन-आसमान का अन्तर होने के कारण इनको देश की जनता को केवल उपदेश देते रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं रह गया है। देश के करोड़ों युवाओं को रोजगार की सख़्त ज़रूरत है जो यह सरकार उन्हें लगातार आश्वासनों के बावजूद नहीं दे पा रही है।

स्वामी विवेकानन्द के शिकागों में सम्बोधन के 125 वर्ष के मौके पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा युवाओं को आज किये गये सम्बोधन पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि देश व समाज अच्छे खासकर सरकारों की अच्छी नीति व कर्मों से बनता है। सूखे उपदेशों व झूठे सरकारी आश्वासनों से नहीं। इसलिए बीजेपी नेताओं व इनकी सरकारों को अहंकार व जन-विरोधी रवैया त्यागकर सही मायने में जनहित व जनकल्याण के लिये काम करना चाहिये और इस क्रम में आरएसएस की संकीर्ण, जातिवादी व सामप्रदायिक सोच एवं व्यवहार त्याग कर देश निर्माण का सही कार्य करना चाहिये, जो कि इस सरकार में देखने को नहीं मिल रहा है। बीजेपी द्वारा पहले चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिये ’वन्देमातरम्’ का इस्तेमाल किया गया और अब इसको अपने एक राजनैतिक नारे के रूप में बदलने का प्रयास किया जा रहा है जो दुर्भाग्यपूर्ण व देश के लिये चिन्ता की बात है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी युवाओं को शिक्षा, रोजगार व सम्मान आदि नहीं दे पा रहे हैं। लेकिन उपदेश पर उपदेश देते चले जा रहे हैं। वे कहते हैं कि युवाओं को मन्दिर निर्माण से पहले शौचालयों का निर्माण करना चाहिये। लेकिन यह बात वे आरएसएस व बीजेपी वालों को क्यों नहीं समझाते और सरकार की शक्ति का सही इस्तेमाल इन कामों के लिये करने में क्यों कतराते हैं? क्या सरकार की शक्ति का इस्तेमाल केवल गरीबों व मध्यम आय वर्ग वालों को परेशान करने के लिये नोटबन्दी जैसे कार्य व किसानों को उनकी जमीन से बेदखल करने के लिये नया भूमि-अधिग्रहण कानून बनाने के लिये किया जायेगा? यह सरासर गलत है तथा सरकार के नैतिक पतन का द्योतक भी है। ऐसी सरकार की बातों का लोगांे पर क्या कोई अच्छा प्रभाव पड़ने वाला है?

प्रधानमंत्री श्री मोदी ने अपने सम्बोधन में कहा कि, ‘मैं यहां आया, पूरी ताकत से वंदे मातरम वंदे मातरम सुन रहा था, रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मैं पूरे हिंदुस्तान को पूछ रहा हूं क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक है। मैं जानता हूं मेरी ये बात बहुत लोगों को चोट पहुंचाएगी। 50 बार सोच लीजिए, क्या हमें वंदे मातरम कहने का हक है? पान खा कर भारत मां पर पिचकारी मारे और फिर वंदे मातरम बोलें? हम वो लोग सारा कूड़ा कचरा भारत मां पर फेंकेंगे और फिर वंदे मातरम बोलें? इस देश में सबसे पहले किसी को हक है तो देश भर में सफाई का काम करने वाले भारत मां के उन सच्चे संतानों को है।‘ लेकिन प्रश्न यह है कि क्या श्री मोदी की इन बातों का स्वयं बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोगों पर ही इसका कुछ असर पड़ने वाला है?

इसके अलावा हरियाणा के गुड़गाँव स्थित प्राइवेट स्कूल में एक छात्र के साथ हुआ बर्बर व्यवहार और फिर उसकी हत्या को अत्यन्त ही दुःखद व गंभीर मामला बताते हुये सुश्री मायावती जी ने कहा कि यह केवल एक राज्य का ही मसला नहीं है बल्कि यह पूरे देश की समस्या बनता जा रहा है। इसलिये केन्द्र सरकार की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह राष्ट्रीय स्तर पर ठोस नीति बनाकर इस प्रकार की समस्याओं का समाधान करे ताकि देश में कहीं भी इस प्रकार की जघन्य घटनायें नहीं हों।