- उपभोक्ता परिषद ने बुन्देलखण्ड के मीटर्ड किसानों के मिनिमम चार्ज, इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, रेगुलेटरी सरचार्ज समाप्त करने की उठायी मांग और सौंपा प्रस्ताव, कहा केवल फिक्स चार्ज में छूट देने के प्रस्ताव से नहीं मिलेगी राहत।
- उपभोक्ता परिषद ने बुन्देलखण्ड के ग्रामीण घरेलू उपभोक्ताओं की दरों में भी 50 प्रतिशत छूट देने की उठायी पुरजोर मांग।
- आयोग ने सुनवायी के बाद फैसला किया रिजर्व कहा उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव पर जवाब आने के बाद आयोग करेगा फैसला।
लखनऊ, 14 मार्च। पावर कार्पोरेशन द्वारा बुन्देलखण्ड के किसानों के लिये रवि क्राप के तहत फिक्स चार्ज में राहत दिये जाने के मामले पर आज उप्र विद्युत नियामक आयोग में आयोग अध्यक्ष श्री एसके अग्रवाल की अध्यक्षता में सार्वजनिक सुनवायी सम्पन्न हुई जिसमें नियामक आयोग के सचिव संजय श्रीवास्तव निदेशक टैरिफ अमित भार्गव संयुक्त निदेशक अभिषेक श्रीवास्तव सहित पावर कार्पोरेशन व दक्षिणांचल सहित अन्य बिजली कम्पनियों के अभियन्ता उपस्थित थे और साथ ही पावर कार्पोरेशन की तरफ से हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता भी उपस्थित थे।
पावर कार्पोरेशन द्वारा अपनी याचिका में यह लिखा गया था कि किसान केवल एक फसल (रवि) पैदा कर पाते हैं और जब वह कनेक्शन ले लेते हैं तो उन्हें पूरे वर्ष प्रतिमाह फिक्स चार्ज देना पड़ता है, जबकि उन्हें जरूरत केवल 4 माह की होती है। इसके चलते किसानों को काफी दिक्कत आती है, ऐसे में नवम्बर से फरवरी तक 4 माह के बाद किसानों को अक्टूबर से जनवरी तक 8 माह छूट दिये जाने का प्रस्ताव दिया गया था। पावर कार्पोरेशन द्वारा दाखिल याचिका में अनमीटर्ड किसान जो रू. 150 प्रतिहार्स पावर प्रतिमाह देते हैं, उनके लिये 8 माह के दौरान 50 प्रतिशत की छूट अर्थात रू0 75 प्रतिहार्स पावर करने और जिन किसानों के यहां मीटर स्थापित है। उनके यहां 75 प्रतिशत छूट फिक्स चार्ज में देने की बात कही गयी है। यानि की मीटर्ड किसान जो रू0 60 प्रतिहार्स पावर प्रतिमाह फिक्स चार्ज देेते हैं, उन्हें केवल रू0 15 प्रतिहार्स पावर प्रतिमाह देना प्रस्तावित था।
प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से सुनवायी में शामिल उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जिस प्रकार से पावर कार्पोरेशन द्वारा बड़ी चालाकी से बुन्देलखण्ड के किसानों के केवल फिक्स चार्ज में राहत देने का भ्रम फैलाया गया है, वह तब तक राहत देने वाला नहीं होगा जब तक पावर कार्पोरेशन द्वारा मीटर्ड किसानों के मिनिमम चार्ज में भी छूट नहीं दी जाती। कितने दुर्भाग्य की बात है कि यदि मीटर्ड कनेक्शन में 75 प्रतिशत की छूट प्रस्तावित की गयी है। वहीं दूसरी ओर उसे रू0 150 प्रतिहार्स पावर प्रतिमाह मिनिमम चार्ज व रू0 1.75 प्रति यूनिट का जो एनर्जी चार्ज देना है, ऐसे में उसे कोई लाभ नहीं होगा। जब तक मिनिमम चार्ज पूरी तरह समाप्त न किया जाये। उपभोक्ता परिषद ने एनर्जी एफिसिएंट पम्प व बुन्देलखण्ड के शहरी मीटर्ड किसानों पर भी मिनिमम चार्ज को समाप्त करने का मुद्दा उठाया और साथ ही एनर्जी चार्ज में भी छूट देने की मांग उठायी।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष द्वारा बुन्देलखण्ड की गरीबी व भुखमरी से वहां के किसानों व ग्रामीण जनता को निजात दिलाने के लिये यह भी मांग उठायी कि वहां पर लगने वाला रेगुलेटरी सरचार्ज व इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी अविलम्ब समाप्त की जाये। उपभोक्ता परिषद ने बुन्देलखण्ड के किसानों के घरों की घरेलू ग्रामीण दरों में भी 50 प्रतिशत की छूट प्रदान करने की मांग उठाते हुए कहा कि बुन्देलखण्ड के ग्रामीण घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं से केवल 6 माह का बिल वसूला जाये। तब सही मायने में बुन्देलखण्ड की जनता को राहत मिल पायेगी।
आयोग अध्यक्ष ने पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों व अधिवक्ता से जब उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव पर अपना पक्ष रखने को कहा तो दक्षिणांचल सहित पावर कार्पोरेशन के अधिवक्ता महोदय द्वारा यह कहा गया कि उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव पर बिजली कम्पनी अवश्य विचार करेगी। दक्षिणांचल द्वारा पूरे मामले को अपने बोर्ड आफ डायरेक्टर में रखा जायेगा और उसकी सूचना आयोग को ससमय दी जायेगी, जिस पर उपभोक्ता परिषद द्वारा अपना लिखित प्रस्ताव को अविलम्ब दक्षिणांचल व पावर कार्पोरेशन के अधिकारियों सहित नियामक आयोग को भी सौंप दिया गया।
नियामक आयोग द्वारा सुनवायी के बाद यह कहते हुए फैसला रिजर्व कर लिया गया कि पावर कार्पोरेशन उपभोक्ता परिषद के प्रस्ताव पर अपना जवाब दे दे और फिर आयोग ने पूरा मामला सुन लिया है और आयोग उपभोक्ताओं के हित में उचित निर्णय लेगा।







