.पूरे देश में जहां 3.93 करोड़ ग्रामीण घर आजादी के बाद भी बिजली से है वंचित, उसमें उप्र के ग्रामीण अविद्युतीकृत घरों की कुल संख्या 1.45 करोड़ जो चिन्ता का विषय है
.नया बीपीएल बिजली कनेक्शन देने वाली एजेन्सियों की गुणवत्ता बेहद घटिया, फिर भी बिजली कम्पनियां चुप क्यों?
लखनऊ, 04 मार्च। सौभाग्या योजना के तहत सभी ग्रामीण व शहरी बीपीएल घरों को बिजली देने के लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियां जहां बड़े पैमाने पर मेगा कैम्प लगाकर इस योजना को सफल बनाने में लगी हैं। वहीं इसकी सफलता तभी सम्भव है, जब पारदर्शी नीति बनाकर ईमानदारी से बिजली कनेक्शन देने की प्रभावी योजना तैयार की जाये। विगत दिनों राजधानी लखनऊ में मा. ऊर्जा मंत्री श्रीकान्त शर्मा द्वारा जब धरातल पर सच्चाई की परख की गयी तो सभी के होश उड़ गये और बिजली कनेक्शन देने की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा हुआ।
मा. ऊर्जा मंत्री की पहल से बिजली कम्पनियों को सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए। पूरे देश में कुल 18.10 करोड़ ग्रामीण घर हैं, जिनमें 14.16 ग्रामीण घरों को विद्युतीकरण किया जा चुका है और पूरे देश में अभी भी 15 जनवरी, 2018 की स्थिति के अनुसार 3.93 करोड़ ग्रामीण घरों में आजादी के 70 साल बाद भी अभी तक बिजली नहीं पहुंच पायी है। जिसमें उप्र का हाल सबसे ज्यादा चैंकाने वाला है। उप्र में कुल ग्रामीण घरों की संख्या लगभग 3 करोड़ 2 लाख 45 हजार 532 है। जिसमें से केवल 1 करोड़ 56 लाख 50 हजार 456 ग्रामीण घरों में ही बिजली पहुंच पायी है और अभी भी 1 करोड़ 45 लाख 95 हजार 76 ग्रामीण घरों को बिजली अभी भी नहीं पहुंच पायी है। ऐसे में सभी ग्रामीण घरों को बिजली मिल जाये, इसके लिये प्रदेश की बिजली कम्पनियों को पारदर्शी नीति बनानी पड़ेगी। अन्यथा सौभाग्या योजना के तहत सभी घरों को बिजली की योजना सार्थक परिणाम नहीं दे पायेगी।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब सबसे बड़ा सवाल शहरी क्षेत्रों में उन घरों में भी बिजली पहुंचाने का है, जिन घरों में अभी तक बिजली नहीं पहुंच पायी। उसमें खास तौर पर दो तरह की दिक्कते सामने आ रही हैं, एक वह जहां पर प्राइवेट कालोनाइजर अविकसित कालोनी बेचकर चले गये और आम जनता व्यक्तिगत रूप से कनेक्शन लेने में लाचार हैं और दूसरा वह जहां पर 40 मीटर के आगे नियमों के मुताबिक अभियन्ता कनेक्शन न देने के लिये बाध्य हैं। लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच समस्या तब विकराल रूप लेती है जब मनमाने तरीके से कुछ अभियन्ताओं द्वारा 40 मीटर से आगे भी कनेक्शन दे दिये जाते है और जब कोई उपभोक्ता उसका उदाहरण लेकर नया कनेक्शन मांगता है तो उसे नियमों की दुहाई दी जाती है। इससे यह सिद्ध होता है कि नियम भी पारदर्शी तरीके से लागू नहीं किये जा रहे हैं।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि नया कनेक्शन देने के नाम पर अरबों रूपये के मीटरों की खरीद हो रही है, केबिल खरीदे जा रहे हैं, अन्य उपकरण खरीदे जा रहे हैं। निश्चित तौर पर इन सब की खरीद फरोख्त में बड़े पैमाने पर कुछ अभियन्ताओं की दिलचस्पी ज्यादा रहती है, लेकिन जब उनके द्वारा पारदर्शी प्रक्रिया अपनाकर काम करने की बात आती है तो उसमें कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखाता। जिससे पूरे प्रदेश में बड़े पैमाने पर उपभोक्ता परेशान है और सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि जहां पर करोड़ों का टेण्डर लेकर प्राइवेट एजेन्सियां बीपीएल परिवारों सहित अन्य घरों में नये कनेक्शन पर मीटर लगाने का काम कर रही हैं, उनकी गुणवत्ता की ओर किसी का ध्यान नहीं है। जहां पर बड़े पैमाने पर घटिया क्वालिटी के कार्य हो रहे हैं और सामग्री का उपयोग भी हो रहा है। जो आने वाले समय में योजना को फ्लाप करने में







