एमओयू रूट को बढ़ावा देना प्रदेश हित में बिल्कुल नहीं: उपभोक्ता परिषद

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  • इन्वेस्टर्स समिट में सोलर के एमओयू रूट पर भारत सरकार द्वारा जारी टैरिफ पालिसी 2016 लगायगी ग्रहण किसी भी नये एमओयू रूट के उत्पादन ग्रह से सरकार 35 प्रतिशत अधिक नहीं खरीद सकती बिजली
  • अडानी ग्रीन सोलर की बिडिंग रूट में रू0 8.44 की लगा चुका है बोली ऐसे में एमओयू रूट में बिजली की दर का क्या होगा हाल? भगवान ही मालिक
लखनऊ, 22 फरवरी। उप्र में चल रही इन्वेस्टर्स समिट में सोलर पावर के क्षेत्र में लगभग 60 हजार करोड़ रूपया निवेश की बात हो रही है और अडानी ग्रुप द्वारा लगभग 1600 मेगावाट सोलर लगाने की बात हो रही है। उप्र में एमओयू रूट परियोजनाओं का हाई प्रोफोइल मामला सभी के सामने है पूरे देश में जब एमओयू रूट को उपभोक्ता विरोधी बताते हुये बिजली क्षेत्र की सरकारी कम्पनियों ने हाथ खीच लिया फिर उप्र में यह बात क्यों हो रही है।
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि उप्र बिजली के क्षेत्र में एमओयू रूट की बात करने वाली उप्र सरकार को पहले भारत सरकार द्वारा जारी टैरिफ नीति जनवरी, 2016 का अध्ययन करना चाहिये जिसमे स्पष्ट रूप से धारा 5.2 में प्राविधानित है कि एमओयू रूट में जिन निजी घरानों द्वारा पूर्व में बिजली का उत्पादन गृह लगाया गया है उनके द्वारा अपनी स्थापित क्षमता का शत् प्रतिशत विस्तार किया जा सकता है और आगे यह भी प्राविधानित है यदि कोई नया उत्पादन गृह किसी भी क्षेत्र में चाहे वह वैकल्पिक ऊर्जा का क्षेत्र हो उसके द्वारा एमओयू रूट के तहत लगायी गयी परियोजना की कुल क्षमता का बिजली कम्पनियाँ अधिकतम 35 प्रतिशत से अधिक नहीं खरीद सकती उसके लिये यह भी जरूरी होगा कि राज्य सरकार एक नीति बनाये। ऐसे में चाहकर भी उप्र सरकार अडानी ग्रुप से लगने वाली एमओयू रूट की कुल क्षमता का 35 प्रतिशत से ज्यादा नहीं खरीद सकती। सोलर के क्षेत्र में किसी भी निजी घराने द्वारा एमओयू रूट के तहत उत्पादन गृह अभी तक उप्र नहीं लगाया गया है। ऐसे में उसमे विस्तार की बात करना बेमानी होगा।

आने वाले समय में निजी घरानों का बोलबाला होगा: उपभोक्ता परिषद

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व विश्व ऊर्जा कौंसिल के स्थायी सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा विगत दिनों उप्र में जब बिडिंग रूट के तहत सोलर टेण्डर हुये थे तो मिनिमम दर रू0 7.02 प्रति यूनिट आयी थी जिसमें अडानी ग्रीन की दर रू0 8.44 प्रति यूनिट थी। इससे अन्दाजा लगाया जा सकता है कि अडानी ग्रुप बिडिंग रूट में भी उच्च बोली में ज्यादा विश्वास रखता है ऐसे मे एमओयू रूट की दरें क्या होंगी? भगवान ही मालिक है पूर्व में भी भारत सरकार द्वारा 05 जनवरी, 2011 के बाद एमओयू रूट को प्रतिबन्धित किया था लेकिन अब नई टैरिफ पालिसी 2016 आने के बाद उसमे कुछ शर्तों के साथ नया बदलाव किया गया है। ऐसे में उचित होगा कि उप्र सरकार को एमओयू रूट से बाहर निकलकर बिडिंग रूट की तरफ बढ़ना चाहिये जो प्रदेश की जनता के लिये हित मे होगा।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा कि जिस प्रकार से एमयू रूट के लिये सरकार जुटी है उससे तय है आने वाले समय में प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र में निजी घरानों का बोलबाला होगा और प्रदेश की जनता भुगतना पडेगा।