- 5 शहरों के निजीकरण के मामले पर उपभोक्ता परिषद ने किया खुलासा, केन्द्र सरकार ने कहा अधिक ऐटीसी हानियों वाले क्षेत्रों के लिये फ्रेन्चाईजी की हो व्यवस्था यहां 5 मलाईदार जिलो को ही निजी कम्पनियों को सौपने की हो गयी तैयारी
- टोरेन्ट पावर का उदाहरण देने के पहले सरकार इस पर करे विचार कि आगरा में फ्रेजाईजी शुरू होने के पहले जो रू. 1147 करोड़ का था बकाया वह कहां चला गया
- सरकारी विभागों का बकाया यदि हो जाये वसूल तो 2 वर्षों तक न बढानी पड़ेगी बिजली दर और पूरे ग्रामीण क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था भी आ जायेगी पटरी पर
लखनऊ, 22 मार्च। 5 शहरों लखनऊ, गोरखपुर, मेरठ, वाराणसी एवं मुरादाबाद के निजीकरण के लिये उप्र सरकार के कैबिनेट द्वारा लिये गये फैसले पर आज उपभोक्ता परिषद ने बोलते हुये कहा कि फ्रेन्चिाईजी की योजना पर विद्युत मंत्रालय भारत सरकार द्वारा दिसम्बर, 2017 में प्रमुख सचिव ऊर्जा को जो निर्देश दिये गये थे उसमें यह स्पष्ट रूप से अंकित था उन शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में फ्रेन्चाईजी रखने की योजना बनाई जाये जहां ऐटीसी हानियां सबसे ऊपर हो ऐसे में जिन इन 5 शहरों का चयन किया गया उससे ऐसा प्रतीत होता है कि निजी घरानों को बड़ा फायदा पहुंचाने के लिये यह कदम उठाया गया क्योंकि इन शहरों का थ्रो रेट रू. 5 से लेकर रू. 6.50 के बीच है।
दूसरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस टोरेन्ट पावर आगरा का उदाहरण देकर आगे निजीकरण किया जा रहा है और यह कहा जा रहा है कि 5 वर्षों में टोरेन्ट पावर द्वारा वितरण को सुदृढ़ करने के लिये रू. 827 करोड़ का निवेश किया गया क्या उप्र सरकार को यह नहीं मालूम है कि जब टोरेन्ट पावर को फ्रेन्जाईजी दी गयी थी आगरा के विद्युत उपभोक्ताओं पर रू. 1147 करोड़ का मूल बकाया था। बकाया वसूल करके ही टोरेन्ट माला-माल हो जायेगा। उपभोक्ता परिषद ने मा. मुख्यमंत्री से मांग की है कि 5 शहरों का निजीकरण जनहित में सरकार निरस्त करे और वास्तव में ऊर्जा क्षेत्र का सुधार चाहती है तो सरकारी विभागों के बकाया वसूलने के लिये सरकार फ्रेन्चाईजी नियुक्त करे तो ज्यादा उचित होगा, और उसका लाभ सीधे जनता को मिलेगा।
उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा एक तरफ सरकार बड़े-बड़े दावे करती है कि उदय स्कीम लागू होने से ऊर्जा क्षेत्र में विकास हो जायेगा और लाईन हानियां 15 प्रतिशत पर आ जायेगी और दूसरी तरफ निजीकरण की बात भी लाइन लाॅस को कम करने को लेकर हो रही है। विगत दिनों में उदय मानिटरिंग कमेटी की एक महत्वपूर्ण बैठक में बिजली कम्पनियों का डिस्काम वार जो सरकारी विभागों पर बकाया सामने आया यदि उप्र की सरकार सभी बिजली कम्पनियों को सरकारी विभागों पर बकाया धनराशि यदि बजेटरी प्रोविजन के माध्यम से दिला दे तो अगले 2 वर्षों तक बिजली दर में बढ़ोत्तरी की जरूरत नहीं पड़ेगी और पूरे ग्रामीण क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पटरी पर आ जायेगी। वर्तमान में सरकारी विभागों पर डिस्काम वार बकाया बहुत कुद सच्चाई बयां कर देगा। अभी जो बकाया रू. 10323 दिख रहा यह मार्च, 2018 के अन्त तक रू. 10756 करोड़ हो जायेगा।
बिजली कम्पनी सरकारी विभागों पर बाकाया (करोड़ो में)
दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम 2613 करोड़
केस्को विद्युत वितरण निगम 474 करोड़
मध्यांचल विद्युत वितरण निगम 3628 करोड़
पश्चिामंचल विद्युत वितरण निगम 2130 करोड़
पूर्वाचंल विद्युत वितरण निगम 1478 करोड़
उत्तर प्रदेश का कुल बकाया 10323 करोड़







