किताबें अकेलपन की सबसे बड़ी साथी होती हैं – श्री नाईक

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राज्यपाल ने राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन किया

लखनऊ: 11 अगस्त, उत्तर प्रदेश के राज्यपाल श्री राम नाईक ने आज मोती महल लाॅन में ‘स्वच्छता एवं पर्यावरण चेतना’ को समर्पित राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोहों में पद्म श्री डाॅ. सुनील जोशी, श्री मुरधीधर आहूजा, श्री राकेश त्रिपाठी, संयोजक श्री देवराज अरोड़ा व बड़ी संख्या में विद्वतजन एवं पुस्तक प्रेमी उपस्थित थे। राज्यपाल ने इस अवसर पर डाॅ. सुनील जोशी की पुस्तक ‘गजल घर’ तथा श्री शैलेन्द्र भाटिया की पुस्तक ‘सफेद कागज’ के लोकार्पण के साथ-साथ डाॅ. सुनील जोगी की पुत्री सुश्री शिवोना की चित्रकला प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। लोकार्पण कार्यक्रम में राजकीय विद्यालय की छात्राओं ने नृत्य भी प्रस्तुत किया।
राज्यपाल ने उद्घाटन के उपरान्त अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि लखनऊ के लिए यह प्रसन्नता की बात है कि लगातार 14 वर्षों से राष्ट्रीय पुस्तक मेले का आयोजन किया जा रहा है। किताबें अकेलपन की सबसे बड़ी साथी होती हैं। किताबों की अपनी ताकत होती है जिसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि प्रथम स्वातंत्र्य समर पर वीर सावरकर द्वारा लिखी पुस्तक पर अंग्रेजों ने पाबंदी लगा दी थी। लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने यांगून के मण्डाला जेल में रहते हुए ‘गीता रहस्य’ नाम की पुस्तक लिखी थी तथा आखिरी बादशाह कहे जाने वाले बहादुर शाह जफर ने भी यांगून की जेल में रहते हुए अपने भावों को शायरी के रूप में प्रस्तुत किया था। उन्होंने कहा कि किताबों की ताकत को पहचानने की जरूरत है।
श्री नाईक ने कहा कि किताबों को देखने से आंखों को समाधान मिलता है और असर भी क्षणिक होता है मगर किताब को पढ़ने से उससे ज्यादा आनन्द मिलता है। अपनी रूचि के अनुसार किताब खरीदकर पढ़े क्योंकि मुफ्त में मिली किताब या रद्दी के भाव जाती है या केवल अलमारी की शोभा बनती है। यदि पुस्तक खरीदी जाती है तो उसका लाभ लेखक, प्रकाशक एवं विक्रेता को भी मिलता है। उन्होंने कहा कि मेले का उद्देश्य तभी सफल होगा जब लोग किताब को खरीदकर पढ़ेगे। राज्यपाल ने यह भी बताया कि उनका संस्मरण संग्रह ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ मराठी सहित हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू एवं गुजराती भाषा में प्रकाशित हो चुका है। अनेक लोगों ने संस्कृत, बंगाली, सिंधी, फारसी और जर्मन भाषा में अनुवाद करने के लिए उनको प्रस्ताव दिया हैं जिस पर शीघ्र विचार करके इन भाषााओं में भी अनुवाद किया जाएगा।
राज्यपाल ने कहा कि राष्ट्रीय पुस्तक मेले द्वारा ‘स्वच्छता एवं पर्यावरण चेतना’ का विषय अत्यंत सामयिक है। पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने के लिए भारत सहित पूरे विश्व में चिन्तन हो रहा है। गाय दूध देती है इसलिए उसे माँ कहा जाता है तथा गंगा से हमें जल मिलता है इसलिए उसे भी माँ का दर्जा दिया गया है। लोगों की धारणा है कि गंगा जल से मुक्ति मिलती है लेकिन गंगा का जल दूषित हुआ है। उन्होंने कहा कि जब गंदगी हमने की है तो सफाई भी हमें ही करनी होगी। राज्यपाल ने अपने म्यांमार यात्रा की चर्चा करते हुए यह भी बताया कि म्यांमार में सभी धर्मों के प्रमुख आचार्यों की परिषद थी जिसमें सभी धर्मों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध तथा पर्यावरण रक्षा पर गंभीरता से विचार-विनिमय करने के बाद एक संकल्प पत्र भी जारी किया गया।
इस अवसर पर श्री मुरलीधर आहूजा ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा पद्मश्री डाॅ. सुनील जोशी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भी प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि 20 अगस्त तक चलने वाले पुस्तक मेले का समापन उप मुख्यमंत्री श्री केशव प्रसाद मौर्या द्वारा किया जाएगा।

मोतीमहल लान में 10 दिवसीय पुस्तक मेला शुरू

लखनऊ, 11 अगस्त। ‘अकेेले में किताब जैसा दोस्त कोई हो ही नहीं सकता। किताबे खरीदने की आदत डालनी चाहिए। आग्रह है कि किताबें खरीदकर पढ़ें, जो मुफ्त में मिलता है वो रद्दी में जाता है। खरीदने से जिसकी किताब बिकती है, उस लेखक को भी कुछ रायल्टी मिल जाती है। पढ़ने का आनन्द ही बहुत अलग है।’
आज शाम मोतीमहल वाटिका लाॅन राणा प्रताप मार्ग में 20 अगस्त तक चलने वाले राष्ट्रीय पुस्तक मेले का उद्घाटन करते हुए उक्त उद्गार राज्यपाल राम नाईक ने व्यक्त किए। मेले में अब कल से विविध सांस्कृतिक साहित्यिक आयोजन भी प्रारम्भ हो जाएंगे। पुस्तक मेले में पुस्तकें न्यूनतम 10 प्रतिशत छूट पर मिलेंगी।
राज्यपाल ने मेले के साथ ही बालिका शिवोना श्रीधरा की चित्र प्रदर्शनी का उद्घाटन करने, और डा.सुनील जोगी की ‘गजलघर’ व शैलेन्द्र भाटिया के काव्यसंग्रह ‘सफेद कागज’ का लोकार्पण करते हुए मेले के विषय स्वच्छता और पर्यावरण चेतना पर कहा कि अभी म्यांमार में 30 देशों के प्रतिनिधियों ने वहां पर्यावरण रक्षा का संकल्प लिया और विचार किया कि कैसे हम धार्मिक विचारों और इकट्ठा लाएं और पर्यावरण की चुनौतियों का सामना करें। महात्मा गंाधी के स्वच्छता आंदोलन और फिर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वच्छता आंदोलन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि गंगा हमने प्रदूषित की है तो उसे साफ करने की जिम्मेदारी भी हमारी बनती है। अपनी किताब ‘चरैवेति-चरैवेति’ के बारे में उन्होंने बताया कि मराठी से हिंदी, अंग्रेज़ी, गुजराती और उर्दू में अनूदित होने के बाद अब जर्मन, पर्शियन, सिंधी और संस्कृत में अनुवादित हो रही है।
नाॅलेज हब की ओर से यहां 10 दिन तक निःशुल्क प्रवेश वाले ‘स्वच्छता व पर्यावरण चेतना‘ को समर्पित इस आयोजन के बारे में अतिथियों का स्वागत करते हुए संयोजक देवराज अरोड़ा ने कहा कि कोई अगर पुस्तक मेला गांव में भी आयोजित करना चाहे तो वह उसमें मदद करेंगे। बाल नृत्य प्रस्तुति से शुरू हुए समारोह के अंत में आभार व्यक्त करते हुए हास्यकवि डा.सुनील जोगी ने अपनी रचना ‘ट्विटर और फेसबुक से आज मुश्किल में किताबे हैं’सुनाते हुए बताया कि मेले में नौ प्रशासनिक अधिकारियों का विशिष्ट कवि सम्मेलन भी होगा। इससे पहले विशिष्ट अतिथि राकेश त्रिपाठी ने भी विचार व्यक्त किये। इस अवसर पर संरक्षक मुरलीधर आहूजा, अंजू अरोड़ा, डा.विद्या विंदु सिंह समेत अनेक रचनाकार और पुस्तकप्रेमी उपस्थित थे। मेले में साहित्यिक कार्यक्रमांे की शृंखला में पुस्तकों के लोकार्पण, संगोष्ठी, विचार गोष्ठी का आयोजन, काव्य गोष्ठी, कवि सम्मेलन, मुशायरा नियमित आयोजित होंगे। अनेक साहित्यकारों की पुस्तकों का लोकार्पण होगा। विशिष्ट कार्यक्रमों में साहित्यकार शिरोमणि सम्मान डा.विद्याविंदु सिंह को और सेवा रत्न सम्मान विशिष्ट विद्वानों को प्रदान किये जायेंगे। इसके अतिरिक्त त्रिलोचन शास्त्री, मुक्तिबोध, राही मासूम रजा की स्मृति में समारोह व सेमिनार और रचनाकारों से संवाद के साथ होंगे। प्रकृति से जुड़ने का संदेश भी लेखक व पर्यावरणविद् देंगे। निःशुल्क प्रवेश वाला यह मेला नित्य सुबह 11 बजे से रात नौ बजे तक चलेगा।
मेले के प्रमुख प्रकाशकों में राजकमल, लोक भारती, राजपाल एण्ड संस, प्रभात प्रकाशन,
प्रकाशन संस्थान, राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, किताबघर, वाणी प्रकाशन, डायमण्ड बुक्स, सम्यक प्रकाशन,
ओशो दर्शन, साहित्य भण्डार, अमन प्रकाशन, राजस्थान पत्रिका, परिमल प्रकाशन, बिहार ग्रन्थ
अकादमी, कबीर ज्ञान केन्द्र, केके पब्लिकेशन, यूनीकार्न बुक्स, राजा पाकेट बुक्स, उपकार प्रकाशन,
देवबुक्स, ताज स्टेशनरी, आॅनलाइन गाथा, भारतीय कला प्रकाशन, वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली
आयोग, गायत्री ज्ञान मन्दिर, श्रीऔषध प्रतिष्ठान, पब्लिकेशन डिविजन, भारतीय ज्ञानपीठ आदि मुख्य हैं।
साथ ही एन.सी.पी.यू.एल., राई बुक डिपो, हैवेन आॅनअर्थ, गौतमबुक सेण्टर, साक्षी प्रकाशन, क्रिएटिव
साइन्टिफिक एडस्, राजबुक कम्पनी, वेब क्लास एजुकेशन, वैदिक रिवोल्यूशन मिशनरी, सेन्ट्रल हिन्दी
डायेक्ट्रेट, विधि बुक्स, नियोगी बुक्स, आशीर्वाद बुक सेण्टर, अमर चित्रकथा, एक्यूपे्रशर हेल्थकेयर
सिस्टम, यूनीक बुक्स और गंगा-जमुनी तहजीब के शहर के किताबों के इस मेले में उर्दू के स्टालों में
नेशनल प्रमोशन आफ उर्दू लैंग्वेज, उ.प्र.उर्दू अकादमी, राई बुक व मधुर संदेश प्रकाशन आदि के भी
स्टाल हैं।
पुस्तक मेले में आज 12 अगस्त 2017 
अपराह्न 12.30 बजे – रामनगीना मौर्य की पुस्तक का लोकार्पण
अपराह्न 2.00 बजे – नेत्र रोग विशेषज्ञ डा.वंदना मिश्र से बातचीत
अपराह्न 3.30 बजे- अभिव्यक्ति संस्था द्वारा सम्मान समारोह व कथा संग्रह ‘सांध्य वेला’ का लोकार्पण
शाम 7.00 बजे – काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह

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