महाराज दशरथ के पुत्र वियोग विलाप देखकर दर्शकों की आंखों हुई नम, भगवान राम के वन गमन करने पर शोक में डूबा आयोध्या रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई
कौशाम्बी, 29 सितंबर 2025: मंझनपुर स्थित हिन्दू धर्म सभा श्री रामलीला कमेटी द्वारा आयोजित रामलीला के आठवें दिन भगवान राम के वनवास की मार्मिक लीला का मंचन हुआ। अयोध्या नरेश महाराज दशरथ ने अपने पुत्र राम को राजा बनाने का निर्णय लिया और मंत्री सुमंत को राज्याभिषेक की तैयारी का आदेश दिया। लेकिन महारानी कैकेयी की दासी मंथरा ने उनके कान भरकर उन्हें भड़काया।

कैकेयी ने राजा दशरथ से अपने दो पुराने वरदानों का उपयोग करते हुए अपने पुत्र भरत के लिए राजतिलक और राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा। रघुकुल की रीत निभाते हुए दशरथ ने वरदान स्वीकार किया। राम, सीता और लक्ष्मण के साथ वन गमन के लिए प्रस्थान करते समय दशरथ का पुत्र वियोग में विलाप देख दर्शकों की आंखें नम हो गईं। अयोध्या नगरी शोक में डूब गई। राम तमसा नदी के किनारे पहुंचे, जहां उन्होंने रात्रि विश्राम किया।
रामलीला कमेटी के अध्यक्ष आशीष केसरवानी, महामंत्री पंकज शर्मा, उपाध्यक्ष ज्ञानचंद्र गुप्ता, कोषाध्यक्ष सोनालाल केशरवानी सहित कई पदाधिकारी और स्थानीय लोग उपस्थित रहे। मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया, जो रघुकुल की वचनबद्धता और राम के त्याग को देखकर अभिभूत हो गए।







