खुलासा : दुनिया का कोई भी हिस्सा भीषण गर्मी से नहीं बचा
नई दिल्ली, 7 जून : जलवायु परिवर्तन का प्रभाव अब दुनिया के हर कोने में साफ दिखने लगा है। पिछले 12 महीनों में दुनिया की लगभग आधी आबादी यानी करीब 400 करोड़ लोगों को औसतन 30 अतिरिक्त बेहद गर्म दिन झेलने पड़े हैं। यह बढ़ी हुई गर्मी 1991 से 2020 के बीच दर्ज सामान्य गर्म दिनों की तुलना में कहीं अधिक रही है । भारत में भी इसका सीधा असर महसूस किया गया। देश में एक साल में लोगों को 20 दिन अतिरिक्त तीव्र गर्मी का सामना करना पड़ा।
अरुणाचल प्रदेश में यह संख्या 44, जबकि जम्मू-कश्मीर में 22 दर्ज की गई। ये वे दिन थे जब तापमान अपने सामान्य स्तर से काफी अधिक था और शरीर पर इसका गंभीर प्रभाव देखा गया।
यह जानकारी एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट में दी गई है। जलवायु परिवर्तन और अत्यधिक गर्मी की वैश्विक बढ़ोतरी नामक यह रिपोर्ट वर्ल्ड वेदर एट्रीब्यूशन, क्लाइमेट सेंट्रल और रेड क्रॉस रेड क्रिसेंट क्लाइमेट सेंटर के वैज्ञानिकों ने वर्ल्ड हीट एक्शन डे पर प्रस्तुत की गई है। इसमें मई 2024 से मई 2025 की अवधि में पड़ी गर्मी का गहन विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार 195 देशों और क्षेत्रों में बीते 12 महीनों में अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या दोगुनी हो चुकी है। इस दौरान लू (हीटवेव) की 67 घटनाएं दर्ज की गई, जिनमें हर एक घटना पर जलवायु परिवर्तन की स्पष्ट छाप देखी गई। इन घटनाओं ने न सिर्फ स्वास्थ्य बल्कि संपत्ति और जीवन की गुणवत्ता पर भी गहरा असर डाला।







