सभी बुराइयों का मूल कारण हमारी अज्ञानता!

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अतिथि के घर आगमन पर यदि व्यक्ति को खुशी नहीं हो व उसके नेत्रों से प्रेम नहीं झलके तो ऐसे व्यक्ति के घर कभी नहीं जाना चाहिए, भले ही वहां सोने की बरसात हो रही हो। आप ऐसे व्यक्ति के घर जाएं, जहां पर आपको आदर मिले और आपसे बिछुड़ने पर पीड़ा का एहसास हो। ऐसे मित्र के घर भूखा रहकर भी प्रसन्नता का अहसास होगा।

सभी बुराइयों का मूल हमारी अज्ञानता है, जिसे हम छिपाना चाहते हैं, क्योंकि हमें अज्ञानी कहलवाने का भय सता रहा है। जबकि सच्चई में हम स्वयं को उचित व ज्ञानी मानने में विवश हैं। ज्ञान के पैमाने पर हमने स्वयं को जांचा परखा ही नहीं है, परंतु स्वयं को सिद्ध पुरुष मानना हमारी विवश्ता ही है। अत: ज्ञान, अभ्यास एवं अनुभव के आधार पर अच्छाई व बुराई को पृथक कर सफलता के लिए प्रयास करना चाहिए।

हमें सदैव समाज में प्रेम का अनुसरण तथा सम्मान जनित भाषा का प्रयोग करना चाहिए। हमारी भाषा शैली से ही हमारे व्यावहारिक होने का पता चलता है। हमारा मन सदैव दूसरों को आदर देने का होना चाहिए। अतिथि सत्कार के लिए हमें सदैव तत्पर रहना चाहिए। घर पर आए दुश्मन को भी हमें सम्मान के साथ आदर सत्कार देना चाहिए। अर्थात् अतिथि के घर आगमन पर यदि व्यक्ति को खुशी नहीं हो व उसके नेत्रों से प्रेम नहीं झलके तो ऐसे व्यक्ति के घर कभी नहीं जाना चाहिए, भले ही वहां सोने की बरसात हो रही हो। आप ऐसे व्यक्ति के घर जाएं, जहां पर आपको आदर मिले और आपसे बिछुड़ने पर पीड़ा का अहसास हो। ऐसे मित्र के घर भूखा रहकर भी प्रसन्नता का एहसास होगा।