Close Menu
Shagun News India
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Facebook X (Twitter) Instagram
    Monday, August 31
    Shagun News IndiaShagun News India
    Subscribe
    • होम
    • इंडिया
    • उत्तर प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • राजस्थान
    • खेल
    • मनोरंजन
    • ब्लॉग
    • साहित्य
    • पिक्चर गैलरी
    • करियर
    • बिजनेस
    • बचपन
    • वीडियो
    • NewsVoir
    Shagun News India
    Home»ब्लॉग»Current Issues

    कृष्णा सोबती का जाना

    By January 27, 2019Updated:January 27, 2019 Current Issues No Comments4 Mins Read
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Share
    Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp
    Post Views: 1,244

    जिस तरह से कृष्णा सोबती अपने 94वें जन्मदिन से 24 दिन पहले हम सबको अलविदा कह गयीं वह बेहद दुखद है कृष्णा सोबती को हिंदी साहित्य की बेमिसाल लेखिका कहा जाता है।

    कृष्णा सोबती की वेशभूषा के बारे में बात करें तो वह हंसता हुआ चेहरा और वह बिंदासपन वाकई कमाल था। जब वे बोलती थीं तो मन करता था कि बस उन्हें घंटों सुनते ही जाओ। कृष्णा सोबती की कहानी ‘सिक्का बदल गया’ स्कूल के दिनो में पढ़ी थी और उसके कैरेक्टर शाहनी और शेरा जेहन में रचे-बसे थे। उनकी कृति विभाजन की पीड़ा कहानी की तो जान थी।

    जिस किसी ने 94 साल की उम्र में अस्वस्थता के बावजूद 1 नवंबर 2015 को दिल्ली के मालाबंकर सभागार के मंच तक व्हीलचेयर पर आई और व्यवस्था के प्रति अपना प्रतिरोध दर्ज कराती कृष्णा सोबती को देखा या सुना होगा उसे कृष्णा सोबती के होने का मतलब बताने की जरूरत नहीं।

    उस दिन सोबती ने न सिर्फ मौजूदा हालात के खिलाफ विरोध का स्वर बुलंद किया था बल्कि सत्ता से धीरे-धीरे सीधे-सीधे कुछ सवाल भी पूछे थे वह लेखकों संस्कृतिकर्मियों पर चारों ओर से हो रहे हमले से छुब्ध और आक्रोश भरे स्वर में कहा था जिन लोगों का साहित्य से कोई परिचय ही नहीं है। जिन्हें भारतीयता का कोई बोधि ही नहीं है। वे लेखकों को भारतीयता सिखाएं और उनके विरोध को मैनुफै्क्चर्ड बताएं हमारे समय की इससे बड़ी कोई दूसरी विडंबना नहीं हो सकती।

    कृष्णा सोबती का यह गुस्सा तब भी दिखा था, जब 2010 में उन्होंने पदम भूषण सम्मान देने की भारत सरकार की पेशकश ठुकरा दी थी कि एक लेखक के तौर पर मुझे सत्ता प्रतिष्ठान से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। अभिव्यक्ति की आजादी और आम आदमी के पक्षधर में मुखर रहने वाली वह आवाज अब हमारे बीच नहीं है।

    आज के दौर में, जब शब्दों की अर्थव्यवस्था संकट में हो, कृष्णा सोबती ऐसी रचनाकार थी, जिन्होंने शब्दों की शक्ति को न सिर्फ कमजोर होने से बचाया बल्कि उन्हें नए सिरे से सशक्त किया। उनके लेखन के एक- एक शब्द के पीछे सच्चाई और साहस का आधार है जो किसी के रोब में झुकना नहीं जानता।

    नामवर सिंह ने बिल्कुल सही कहा है कि सोबती शब्दों को अपनी जिंदगी की तरह जीती रहीं। उन्होंने हिंदी के मर्द वादी लेखकों को एक नया मुहावरा दिया जो स्त्रीवादी लेखन की प्रचलित परिपाटी और प्रचलित मुहावरे से कहीं अलग था लेकिन उन्होंने खुद को कभी स्त्रीवादी लेखन के चौखट में रखना मंजूर नहीं किया। उनके लेखक का मतलब लेखक था। जिसे किसी तमगे की जरूरत नहीं थी।

    एक बड़ी रचनाकार होने के साथ-साथ वह अपने समय समाज से अलग न रहकर सीधे-सीधे जिस तरह हस्तक्षेप करती थी। उनके समूचे रचनात्मक अवदान को देखते हुए कहा जा सकता है कि वह हमारे हिंदी समाज के लिए आज के दौर में अंतरआत्मा की आवाज़ थी। वह बेजोड़ और साहस की ऐसी प्रतीक थी जिनमें अपने बौद्धिक बेलगाम और साहस पूर्ण हस्तक्षेप के साथ समाज में पब्लिक सामंजस्य की भूमिका का निर्वाहन किया। यह अनायास नहीं था कि 94 वर्ष की उम्र में 2017 में जब उन्हें साहित्य के क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान पुरस्कार देने की घोषणा हुयी तो समूचे समाज ने देर से दिया गया सम्मान कहा ।

    उन्हें उनके उपन्यास ‘जिंदगीनामा’ के लिए वर्ष 1980 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला और 1996 में एकेडमी के साहित्य अकैडमी के उच्तम सम्मान साहित्य अकादमी फेलोशिप से नवाज़ा गया ।हाल ही में प्रकाशित बंटवारे की पृष्ठ्भूमि पर लिखा गया उपन्यास ‘गुजरात पाकिस्तान से गुजरात हिंदुस्तान विभाजन पर तक लिखे गए तमाम उपन्यासों में अलग साबित हुआ है वह उस मौलिक ऊर्जा मौखिक मुहावरे के साथ हर बार बड़े समाज के समक्ष उपस्थित होती रहीं उनकी वह उपस्थिति और ऊर्जा उनके शब्दों के रूप में हमारे साथ बनी रहेगी।

    Keep Reading

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    Play ‘Ghar Ki Murgi’ staged in Lucknow

    लखनऊ में नाटक ‘घर की मुर्गी’ का मंचन

    Trump Trapped in a Labyrinth: US President's Mounting Difficulties Amid the Maze of an Iran War

    चक्रव्यूह में फंसे ट्रंप: ईरान युद्ध की भूलभुलैया में अमेरिकी राष्ट्रपति की बढ़ती मुश्किलें

    the rebel of worry

    फ़िक्र का बाग़ी

    Maa Khaira Bhavani had appeared in the form of a divine beam of light.

    ज्योति पुंज के रूप में प्रकट हुईं थीं माँ खैरा भवानी

    Is God helpless, or is it our understanding? A new theory of hurt sentiments.

    ईश्वर असहाय या हमारी समझ? आहत भावनाओं की नई थ्योरी

    Leave A Reply Cancel Reply

    Advertisment
    Google AD
    We Are Here –
    • Facebook
    • Twitter
    • YouTube
    • LinkedIn

    EMAIL SUBSCRIPTIONS

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    About



    ShagunNewsIndia.com is your all in one News website offering the latest happenings in UP.

    Editors: Upendra Rai & Neetu Singh

    Contact us: editshagun@gmail.com

    Facebook X (Twitter) LinkedIn WhatsApp
    Popular Posts
    Soulful bhajan ‘Aan Baso Mere Man Darpan Mein’ released on Janmashtami.

    जन्माष्टमी पर रिलीज हुआ भावपूर्ण भजन ‘आन बसो मेरे मन दर्पण में’

    August 26, 2026
    Shopping just got even more stylish! Sara Ali Khan launches Shoppers Stop's new credit cards.

    शॉपिंग अब और भी स्टाइलिश! सारा अली खान ने लॉन्च किए शॉपर्स स्टॉप के नए क्रेडिट कार्ड

    August 26, 2026
    Azim Premji Foundation to provide scholarships to 20,000 female students in Delhi.

    अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन दिल्ली में 20,000 छात्राओं को देगा स्कॉलरशिप

    August 26, 2026
    Women sanitation workers tied Rakhis to the Urban Development Minister.

    स्वच्छताकर्मी महिलाओं ने नगर विकास मंत्री को बांधी राखी

    August 26, 2026

    रक्षाबंधन: परंपरा, पहचान और बाजारवाद का संगम

    August 26, 2026

    Subscribe Newsletter

    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading
    Privacy Policy | About Us | Contact Us | Terms & Conditions | Disclaimer

    © 2026 ShagunNewsIndia.com | Designed & Developed by Krishna Maurya

    Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.

    Newsletter
    Please enable JavaScript in your browser to complete this form.
    Loading