Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 496 दो दोहे संस्मरणों के देश फिर, ले चल मुझको मीत। जहाँ प्रीति का पर्व है, जहाँ मिलन के गीत। ……………………………………….. कभी – कभी साँसें कहें, बस इतना – सा काम। कुछ गीतों के गाँव में, कुछ पल को विश्राम। कमल किशोर ‘ भावुक ‘