किया है क़त्ल पेड़ों का, शहर क्या, गाँव तक ने भी

0
794

ग़ज़ल:

ज़ुबां जो बन्द हो तो क्या, अदा भी बोल देती है।
हथेली में छिपा चेहरा, हया भी बोल देती है।

तुम्हारे नाम पे जीना, तुम्हारे नाम पे मरना,
कहाँ – कितनी वफ़ा बाकी वफ़ा भी बोल देती है।

किया है क़त्ल पेड़ों का, शहर क्या, गाँव तक ने भी,
कहाँ जायें, कहाँ डोलें, हवा भी बोल देती है।

जहाँ टकरा गये रिश्ते, दरारें मुँह चिढ़ाती हैं,
वहाँ क़िरदार में अपने अना भी बोल देती है।

कफ़स की तीलियों को तुम ज़रा सा ग़ौर से देखो ,
वहाँ क्या – क्या गुज़रती है सज़ा भी बोल देती है।

मरीज़ – ए इश्क़ है ये तो, मेरे बस का नहीं भावुक,
खड़े कर दोनों हाथों को दवा भी बोल देती है।

कमल किशोर ‘ भावुक ‘– जुलूस मौसम के ( ग़ज़ल – संग्रह )

Please follow and like us:
Pin Share

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here