सत्रहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला मोतीमहल लान में 20 से

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डेढ़ सौंवी जयंती पर महात्मा गांधी को समर्पित आयोजन में गुजरात होगा अतिथि राज्य

लखनऊ, 16 सितम्बर 2019: राणाप्रताप मार्ग मोतीमहल वाटिका लान लखनऊ में वर्ष 2003 से निरंतर होता आ रहा 10 दिवसीय सत्रहवां राष्ट्रीय पुस्तक मेला 20 से 29 सितम्बर तक चलेगा। दि फेडरेशन आॅफ पब्लिशर्स एण्ड बुकसेलर्स एसोसिएशन्स इन इण्डिया, नई दिल्ली के सहयोग से के.टी.फाउण्डेशन व फोर्सवन द्वारा संयोजित महात्मा गांधी की 150वीं जयंती की थीम पर आधारित यह आयोजन बच्चो-बड़ों सभी को समर्पित होगा। उद्घाटन के लिये मुख्यअतिथि के तौर पर राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल को आमंत्रित किया गया है। निःशुल्क प्रवेश वाले मेले में पुस्तक प्रेमियों को हमेशा की तरह किताबों पर न्यूनतम 10 फीसदी की छूट मिलेगी।

साहित्यिक-सांस्कृतिक नगरी का बहुप्रतीक्षित वार्षिक उत्सव बन चुके इस सत्रहवें राष्ट्रीय पुस्तक मेले के बारे में आयोजक फाउण्डेशन के संयोजक मण्डल मनोज सिंह चंदेल व आकर्षण जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि वर्चुअल वल्र्ड की ओर बढ़ती दुनिया में किताबों का महत्व पहले से बढ़ा ही है। मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र कहलाने वाली किताबें एक लम्बे अरसे से व्यक्ति और समाज के निर्माण में अहम भूमिका निभाती आ रही हैं। मेले में खिलाड़ियों व खेलों को प्रोत्साहन देने वाले उ.प्र. ओलम्पिक संध के महासचिव आनन्देश्वर पाण्डेय को 28 सितम्बर को प्रदेश गौरव सम्मान से नवाजा जायेगा।

गुजरात को अतिथि राज्य का दर्जा देते हुए गुजरात पर्यटन व वहां के प्रकाशकों के स्टाल मेले में विशिष्ट होंगे। प्रधानमंत्री पर आधारित अपूर्व शाह की आदमकद किताब ‘नरेन्द्र मोदीः एक सकारात्मक सोच’ खास आकर्षण होगी। गरबा लोकनृत्य कार्यशाला व गुजराती भाषा सिखाने के विशिष्ट कार्यक्रम भी होंगे। मेले में पहली बार आई-क्यू, एसिलाॅर व आॅप्टीप्रेन्योर के सौजन्य से पुस्तक प्रेमियों के लिये परामर्श व सर्वेक्षण के संग आई चेकअप कैम्प दसों दिन चलेगा।

देश के प्रमुख प्रतिष्ठित पुस्तक मेलों में शुमार 17 वर्षों से बराबर आयोजित इस पुस्तक मेले में प्रभात, राजकमल, किताबघर, राजपाल, सामयिक, लोकभारती, सम्यक, केन्द्रीय हिन्दी निदेशालय, गौतम बुक्स, इण्डियन सोशल इंस्टीट्यूट, प्रकाशन संस्थान, साहित्य भण्डार इलाहाबाद, रामकृष्ण मिशन, उ.प्र.उर्दू अकादमी, गुडवर्ड, चिन्मय मिशन, वैदिक साहित्य, ओशो, एजूकेशनल एण्ड साइन्टिफिक ऐड्स, गायत्री ज्ञान मंदिर, स्काॅलर्स हब, गिडियाॅन्स, तिरुमाला साफ्टवेयर आदि के स्टाल तो होंगे ही, साथ ही निखिल पब्लिशर्स, स्टारडम, काउंसिल फार प्रमोशन आफ सिंधी लैंग्वेज व उर्दू लैंग्वेज, रोशनी पब्लिशिंग, बुक कैफे, वर्ड स्मिथ जैसे कई नये संस्थान शामिल हांेगे।

गंगा जमुनी तहजीब के शहर में चलने वाले इस पुस्तक मेले में  इस बार कथक, गजल, संगीत के विशिष्ट कार्यक्रम होंगे। साथ ही प्रदेश भर में पुस्तक मेले के संयोजक स्वर्गीय उमेश ढल की स्मृति में विशिष्ट कवि सम्मेलन व मुशायरा होगा। साथ ही धनुर्विद्या प्रदर्शन का कार्यक्रम होगा। मेले की सफलता का श्रेय भागीदारों, प्रकाशकों और बड़ी तादाद में आने वाले पुस्तक प्रेमियों को जाता है। यहां दस दिन चलने वाले इस मेले का भागीदार प्रकाशकों व पुस्तक वितरकों कों इंतजार रहता है वहीं मेले में हजारों पाठक और खरीदार कई-कई बार आते हैं। मेले और मेले में आए पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जैसे अतिथियों से पे्ररित होकर घरों में पुस्तकालय स्थापित करने, बुक क्लब बनाने और खरीदकर पुस्तक पढ़ने जैसी गतिविधियां इस मेले की ही देन हैं।

मेले में हमेशा की तरह इस वर्ष भी स्थानीय लेखकों के लिए अलग से निःशुल्क स्टाल की व्यवस्था है, जहां के अपनी पुस्तकें प्रदर्शन व बिक्री के लिए रखवा सकेंगे। यहां गांधी बाल एवं युवा मंच पर बच्चों को जहां प्रतिभा प्रदर्शन का मौका मिलेगा वहीं, 22 को किरन फाउण्डेशन के सौजन्य से ड्राइंग प्रतियोगिता से पहले 21 से ज्वाइन हैण्ड्स फाउण्डेशन व लोक आंगन के सौजन्य से रमेश पाल, सुबोध पाण्डे, संगीता चैबे, ज्योति, रेखा सिंह व नन्दिनी जैसे प्रशिक्षकों के नेतृत्व में उत्तराखण्ड, गुजरात, असम, महाराष्ट्र व उत्तरप्रदेश के लोकनृत्यों का प्रशिक्षण भी दिया जायेगा। ओरियण्ट लैंग्वेज लैब के संयोजन में 21 से 29 तक उर्दू और 28 व 29 सितम्बर को गुजराती की कक्षाएं चलेंगी।

फोन नम्बर 9450692313 पर 18 सितम्बर तक पंजीकरण कराया जा सकता है मुख्य सांस्कृतिक मंच पर पुस्तकों के विमोचन, लेखक से मिलिए, साहित्यिक परिचर्चा कार्यक्रम और कवि सम्मेलन-मुशायरा आदि विविध मनोरंजक सांस्कृतिक कार्यक्रम हर दिन का आकर्षण होंगे। मेले के समापन समारोह में सात अक्टूबर की शाम चुनिंदा स्टाल धारकों व प्रमुख सहयोगियों को अतिथिगण सम्मानित करेंगे।

इस मौके पर समाचार पत्र-इलेक्ट्रानिक मीडिया के प्रतिनिधियों का आभार प्रकट करते हुए संरक्षक मुरलीधर आहूजा, टीपी हवेलिया, डा.अमिता दुबे, आकर्ष चंदेल, ज्योति किरन रतन भी अपने विचार व्यक्त करने के साथ उपस्थित रहे।

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