Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 466 मेरे खिलाफ, सब साजिशें तेरी जानता हूं। पीढ़ी दर पीढ़ी, खून चूसने की कोशिशें तेरी जानता हूं। मैं से हम न हुए, इसलिए दुनिया में दस्तूर हूँ। मजबूर हूँ। मैं मजदूर हूँ। गौतम ग़ाज़ीपुरी