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    Home»ब्लॉग»Current Issues

    मैंने सोचा क्यों न मैं इंस्टाग्राम पर शायरी करूं

    By March 23, 2019 Current Issues No Comments3 Mins Read
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    अंशुमाली रस्तोगी

    इधर, मुझे इंस्टाग्राम पर शायरी करने का भूत सवार हुआ है। लोग फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सएप पर शेर कह रहे हैं, मैंने सोचा क्यों न मैं इंस्टाग्राम पर शायरी करूं। यह थोड़ा लीक से हटकर भी रहेगा और मुझे एक नए सोशल प्लेटफार्म पर शायर होने की इज्जत भी हासिल हो जाएगी। एक पंथ, दो काज होने का अपना ही मजा है।

    एक ही तरह का लेखन करते-करते मुझे बोरियत महसूस होती है। इसीलिए अपने लेखन में नित नए-नए प्रयोग कर लिया करता हूं।
    जब से लोगों के जीवन में सोशल मीडिया ने कदम रखा है, हर कोई अपने मन की बात अपने अंदाज में कह-लिख रहा है। कोई खुद की आत्ममुग्धताओं पर लिख रहा है तो कोई दूसरे को पटखनी देने के लिए। मगर सबसे ज्यादा हाथ लोग कविताओं और शेरो-शायरी में ही आजमा रहे हैं।

    फेसबुक तो कवियों और कविताओं की शरण-स्थली है। मन में भाव चाहे जैसा हो फेसबुक पर वो कविता की शक्ल में आ ही जाता है। आलम यह है, जिन्होंने जीवन में कभी कविता का ‘क’ नहीं पढ़ा-जाना, वे भी मस्त होकर यहां कविताएं लिख रहे हैं। खूब तबीयत से लिख रहे हैं।

    एकाध दफा तो मैंने भी कविता के मैदान में हाथ आजमाए पर बात बनी नहीं। मेरी कविता कविता कम ‘अ-कविता’ ज्यादा जान पड़ती थी। फिर एक दिन मेरे एक शुभचिंतक में समझाया कि तुम कविता का पल्लू छोड़कर शायरी का दामन थाम लो, वो भी इंस्टाग्राम पर। यहां शायरी की अच्छी-खासी डिमांड है। शायरी का बाजार भी खूब है।

    शुभचिंतक की सलाह को संज्ञान में लेते हुए मैंने इंस्टाग्राम पर तुरंत शायरी करना शुरू कर दी। ऊपर वाले का करम से मेरी शायरी यहां खूब फल रही है। अब तो अच्छे-खासे फॉलोवर्स भी बढ़ गए हैं मेरे।

    वैसे, शेरों की तुकबंदी तो मैं बचपन से ही बैठा लिया करता था। कहीं से कैसा भी शेर बना डालता था। लगे हाथ दाद भी मिल जाया करती थी। बाद के दिनों में जब इश्क-मोहब्बत में पड़ा तो पढ़ाई से ज्यादा मन शेरों-शायरी में रमा करता था। बाज दफा तो मुझे खुद में मीर, दाद, ग़ालिब की आत्मा घुसी जान पड़ती थी। यों भी, इश्क की अगन अच्छों-अच्छों को शायर और कवि बना देती है।

    इंस्टाग्राम पर शेरों-शायरी का अपना आनंद है। गुलज़ार साहब को यहां जो रूतबा हासिल है, देखते ही बनता है। गुलज़ार साहब के शेर और कविताएं यहां बिखर कर अपनी खुशबू फैलाए रहते हैं। मैं भी उन्हीं के पदचिन्हों पर चलने की कोशिश में लगा रहता हूं। कभी-कभी मेरे कहे शेर जम भी जाते हैं। भरपूर वाह वाह भी पा जाते हैं। यह मेरे शेरों की मार्केटिंग के लिए भी अच्छा है।

    सिर्फ लिखने से ही बात नहीं बनती, जब तक कुछ कमाई-धमाई न हो। तमाम सोशल प्लेटफार्म के साथ-साथ इंस्टाग्राम भी कमाई का मस्त माध्यम बनकर उभर रहा है। अपने सेलिब्रिटी लोग तो यहां से लाखों पीट रहे हैं। जब वे अपनी ब्रांड-इमेज के दम पर कमा सकते हैं तो मैं ही क्यों पीछे रहूं शायरी के दम पर कमाने में। शायर हो या लेखक थोड़ा-बहुत मनी-माइंडेड तो उसे होना ही चाहिए।

    क्या बुरा है, इंस्टाग्राम पर शायरी का दौर भी चलता रहे और कमाई भी होती रहे। शेरों-शायरी तो हर उम्र के लोगों की जान और पसंद होती ही है। यों भी, शायरी में एक अजीब-सा सुख है। सुख ही अंतिम सत्य है।

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