व्यंग्य: मेरे अंदर ‘देशभक्ति’ की कमी हो गई है

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अंशुमाली रस्तोगी

शरीर में कभी-कभार जैसे नमक, पानी या खून की कमी हो जाती है ठीक ऐसे ही मेरे अंदर ‘देशभक्ति’ की कमी हो गई है। बहुत कोशिश की- शहर के अच्छे से अच्छे डॉक्टर को दिखाया- लेकिन देशभक्ति वापस लौटकर नहीं आ सकी। मैं बड़ा परेशान हूं देशभक्ति के मेरे भीतर न रहने से। परेशान मैं इसलिए भी ज्यादा हूं क्योंकि देश में जिस तरह देशभक्ति का माहौल बना हुआ है, उसमें मैं कहीं ‘फिट’ नहीं बैठता।

रह-रहकर मुझे ‘बुरे ख्याल’ घेर लेते हैं। यही सोचता रहता हूं कि यह समाज, यह दुनिया मुझ जैसे ‘अ-देशभक्त’ को स्वीकार करेगा या नहीं? शरीर में जब देशभक्ति का जज्बा ही न रहेगा फिर मैं कैसे किसी से कह सकूंगा कि हां, ‘मैं भी देशभक्त हूं’। जैसे- प्रधानमंत्री अक्सर खुद को ‘मैं चौकीदार’ कहकर संबोधित करते हैं।

मेरे रिश्तेदार और दोस्त बताते हैं कि शरीर में देशभक्ति की कमी होना सही संकेत नहीं। ऐसे में कोई भी मुझे ‘पाकिस्तानपरस्त’ घोषित कर सकता है। वे मुझे सलाह देते हैं कि मुझे किसी ऊंचे ओझा आदि से खुद को झड़वा लेना चाहिए। कहीं ये सब ‘ऊपरी हवा’ का असर तो नहीं। जमाना खराब है किसी ने कुछ कर न दिया हो।

हो सकता है, ऐसा ही हुआ हो! जबकि एक माह पहले मैं बिल्कुल दुरुस्त था। मेरे मन में रह-रहकर देशभक्ति के विचार आते थे। शरीर एवं आत्मा पूरी तरह से देशभक्ति से भरी पड़ी थी। एकाध दफा तो ऐसे भी हुआ है कि मैंने अपनी देशभक्ति को- जिसे जरूरत हुई- उसे दिया भी है। लेकिन आज सीन कुछ ऐसा है कि मैं देशभक्ति का भाव मेरे शरीर में न आने के लिए तरस रहा हूं। यह ठीक नहीं।

लुत्फ देखिए, मेरे मोहल्ले से लेकर घर तक में एक से बढ़कर एक देशभक्त मौजूद हैं। उनकी देशभक्ति की मैं दाद देता हूं। ऐसा कोई मौका वे छोड़ते नहीं, जब वे अपने देशभक्त होने का प्रमाण न देते हों। उनमें से कितने तो ऐसे हैं, जो हर दूसरे सेंकड में पांच-सात आतंकियों को घर में घुसकर मार आते हैं। अक्सर सोचता हूं, इतने देशभक्त होने के बावजूद वे सीमा पर लड़ने जाने के लिए ट्राई क्यों नहीं करते?

आजकल देशभक्ति की जैसी नदियां सोशल मीडिया पर बह रही हैं कि हर कोई बेताब-सा रहता है, अपने-अपने हाथ धोने को। सोशल मीडिया के ये देशभक्त देश के प्रति कभी-कभी इतने सेंटी हो उठते हैं कि मेरा कलेजा मुंह को आ जाता है। और मैं खुद की देशभक्ति की असफलता पर खुद को गरियाता हूं कि हाय! मैं देशभक्त क्यों न हुआ। आप चाहें तो मेरी देशभक्ति पर ‘शक’ कर सकते हैं।

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