Share Facebook Twitter LinkedIn WhatsApp Post Views: 654 जनता में नफरत भरे, जाति-धर्म के नाम। मुई सियासत देश की, जीना करे हराम॥ जीना करे हराम, रोज की यही कहानी, साजिश के बाजार, भटकती फिरे जवानी, करो बांट कर राज, यही मकसद है इनका। मस्त सियासतदान, भाड़ में जाए जनता॥ – सी. एम. त्रिपाठी
‘पुस्तकें मन को एकाग्र कर परंपराओं से जोड़ती हैं’-ब्रजेश पाठक; ईशा-मीशा रतन की कथक प्रस्तुति ने मोहा मन